दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
आजादी के अमर सेनानी, क्रांतिकारी चेतना के प्रतीक एवं पूर्वांचल की गौरवशाली धरती के वीर सपूत स्वतंत्रता सेनानी रामहर्ष सिंह की प्रेरणादायी जीवनगाथा अब पुस्तक रूप में तैयार हो चुकी है। “वतन के वास्ते : स्वतंत्रता सेनानी रामहर्ष सिंह जी की अमर कथा” नामक यह बहुप्रतीक्षित पुस्तक शीघ्र ही भव्य समारोह में विमोचित की जाएगी।
इस पुस्तक का लेखन ठेकमा के मिशन ब्लॉक प्रबंधक, सह साहित्यकार एवं शोधपरक लेखन के लिए चर्चित डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा किया गया है। पुस्तक में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान रामहर्ष सिंह के अदम्य साहस, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके संघर्ष, क्रांतिकारियों के साथ उनके समर्पण तथा ग्रामीण भारत में राष्ट्रभक्ति की चेतना जगाने वाली घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है।
ज्ञात हो कि रामहर्ष सिंह ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दी और कई ऐतिहासिक आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति में रहे। पुस्तक में उन घटनाओं को प्रमाणिक तथ्यों, जनस्मृतियों और ग्रामीण कथाओं के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है, ताकि नई पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम के उन अनसुने अध्यायों से परिचित हो सके, जो इतिहास के पन्नों में पर्याप्त स्थान नहीं पा सके।
लेखक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि यह पुस्तक सात महीने के गहन शोध के उपरांत लिखा गया एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि उस युग की राष्ट्रीय चेतना, त्याग और संघर्ष की दस्तावेजी विरासत है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह जानना आवश्यक है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं थी, बल्कि लाखों गुमनाम और अल्पज्ञात सेनानियों के बलिदान का परिणाम थी।
उनके ज्येष्ठ पुत्र शशि भूषण सिंह ने बताया कि पुस्तक में स्वर्गीय पिता रामहर्ष सिंह के संघर्षों के साथ-साथ तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों, ग्रामीण क्रांतिकारी आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वांचल की भूमिका को भी प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है। भाषा शैली साहित्यिक होने के साथ-साथ भावनात्मक एवं प्रेरणादायी है, जिससे पाठक स्वयं को उस दौर के बीच महसूस करेगा।
साहित्यिक एवं सामाजिक जगत में इस पुस्तक को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि “वतन के वास्ते” जैसी कृतियाँ राष्ट्र की ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। पुस्तक का विमोचन समारोह ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप में आयोजित किए जाने की तैयारी चल रही है, जिसमें साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अनेक गणमान्य लोग शामिल होंगे।
यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, त्याग और आत्मसम्मान का जीवंत संदेश साबित होगी।

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