दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निजामाबाद तहसील के मजभीटा गांव में बुधवार रात में एक भव्य समारोह जश्ने ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाया गया। जिसकी सदारात मौलाना अलाउद्दीन साहब ने की अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लेमीन की कयादत में मनाया गया। जिसकी शुरुआत हाफ़िज़ सैयद अबूबकर ने कुरआन की तिलावत से की और फिर हसन रज़ा फ़ैज़ी झारखंड, शायर रज़ा भागलपुरी, शानअली ग्यानवी ने नबी की शान में खूब जमकर नातख्वानी की तो बिहार से चलकर आने वाले मौलाना अख्तर फायकुल जमाली
साहब ने एक मोहब्बत भरा बयान देते हुए नबी की आमद का किस्सा बयान किया तथा उनके द्वारा दी गई तालिमात को दुनिया तक पहुंचाने व सामाजिक सौहार्द, भाईचारा, एकता, न्याय, और दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाने वाले आखिरी पैगम्बर की जीवन के बारे में बताया।

याद रहे कि मजभीटा गांव में ये प्रोग्राम पिछले 84 वर्षों से होता चला आ रहा है और इस बार 84 वां वर्ष है। आखिरी पैगम्बर को पैदा हुए 1500 साल हो गए इस बात की भी खूब चर्चा हुई और इसकी खुशी मनाते हुए मौलाना मौलाना अख्तर फायकुल जमाली ने कहा कि हमारे प्यारे पैगम्बर ने पूरी दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया और आज मुसलमानों को भी इंसानियत और मोहब्बत का पाठ दुनिया को पढ़ाने की जरुरत है तथा नबिये पाक का पैगाम सारी दुनिया और उसके सभी इंसान तक पहुंचाने की जरूरत है।’

इसी जलसे में अंजुमन गुलशने मदीना मौज़ा चुनहटा, अंजुमन फ़िदाए मुस्तफा मौज़ा राजापट्टी, अंजुमन आशिकाने मुस्तफा मौज़ा भदुली, अंजुमन रज़ा कमेटी मौज़ा शिवली, अंजुमन गुलामाने मुस्तफा मौज़ा मुकुंदपु कुल 12 अंजुमनों ने भाग लिया। नात व तकरीर का ये सिलसिला रात 9:30 से शुरू होकर देर रात तक चला।
इस अवसर पर अनीस अहमद सिद्दीकी, नफीस अहमद, मोहम्मद आरिफ, सुलेमान रसीद, मोहम्मद तय्यब,तारिक सिद्दीकी, वसीम अफ़रोज़, सय्यद सैफुद्दीन, हसीब सिद्दीकी, फहीम अफ़रोज़, अजमल सिद्दीकी, इनामुलहक़ सिद्दीकी, अब्दुल कादिर, शमसाद अहमद, हाफ़िज़ आरिफ आज़मी, हाफ़िज़ सैफ, महबूब आलम, शफी खान, अरसलान खान, आदि लोग मौवजूद रहे।

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आजमगढ़।
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निजामाबाद तहसील के मजभीटा गांव में बुधवार रात में एक भव्य समारोह जश्ने ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाया गया। जिसकी सदारात मौलाना अलाउद्दीन साहब ने की अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लेमीन की कयादत में मनाया गया। जिसकी शुरुआत हाफ़िज़ सैयद अबूबकर ने कुरआन की तिलावत से की और फिर हसन रज़ा फ़ैज़ी झारखंड, शायर रज़ा भागलपुरी, शानअली ग्यानवी ने नबी की शान में खूब जमकर नातख्वानी की तो बिहार से चलकर आने वाले मौलाना अख्तर फायकुल जमाली
साहब ने एक मोहब्बत भरा बयान देते हुए नबी की आमद का किस्सा बयान किया तथा उनके द्वारा दी गई तालिमात को दुनिया तक पहुंचाने व सामाजिक सौहार्द, भाईचारा, एकता, न्याय, और दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाने वाले आखिरी पैगम्बर की जीवन के बारे में बताया।
याद रहे कि मजभीटा गांव में ये प्रोग्राम पिछले 84 वर्षों से होता चला आ रहा है और इस बार 84 वां वर्ष है। आखिरी पैगम्बर को पैदा हुए 1500 साल हो गए इस बात की भी खूब चर्चा हुई और इसकी खुशी मनाते हुए मौलाना मौलाना अख्तर फायकुल जमाली ने कहा कि हमारे प्यारे पैगम्बर ने पूरी दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया और आज मुसलमानों को भी इंसानियत और मोहब्बत का पाठ दुनिया को पढ़ाने की जरुरत है तथा नबिये पाक का पैगाम सारी दुनिया और उसके सभी इंसान तक पहुंचाने की जरूरत है।’
इसी जलसे में अंजुमन गुलशने मदीना मौज़ा चुनहटा, अंजुमन फ़िदाए मुस्तफा मौज़ा राजापट्टी, अंजुमन आशिकाने मुस्तफा मौज़ा भदुली, अंजुमन रज़ा कमेटी मौज़ा शिवली, अंजुमन गुलामाने मुस्तफा मौज़ा मुकुंदपु कुल 12 अंजुमनों ने भाग लिया। नात व तकरीर का ये सिलसिला रात 9:30 से शुरू होकर देर रात तक चला।
इस अवसर पर अनीस अहमद सिद्दीकी, नफीस अहमद, मोहम्मद आरिफ, सुलेमान रसीद, मोहम्मद तय्यब,तारिक सिद्दीकी, वसीम अफ़रोज़, सय्यद सैफुद्दीन, हसीब सिद्दीकी, फहीम अफ़रोज़, अजमल सिद्दीकी, इनामुलहक़ सिद्दीकी, अब्दुल कादिर, शमसाद अहमद, हाफ़िज़ आरिफ आज़मी, हाफ़िज़ सैफ, महबूब आलम, शफी खान, अरसलान खान, आदि लोग मौवजूद रहे।

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