
आशीष तिवारी
आजमगढ़।
अस्पताल में किलकारी गूंजने की जगह जब सौदेबाजी की भनक लगे तो भरोसा डगमगा जाता है। जी हाँ हम बात कर रहे है आजमगढ़ जिले के सिधारी स्थित रेनवो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की यहाँ ऐसा ही शर्मनाक मामला सामने आया है। जहाँ कथित रूप से एक नवजात बच्चे को बेचने का आरोप लगा है। इस मामले की जानकारी परिजनों को जब हुई तो परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे के पिता को उसका बच्चा वापस तो कर दिया लेकिन इस हंगामे ने अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए है। कारण कि हंगामा कर रहे लोगों ने अस्पताल के कर्मचारी पर पैसा लेकर बच्चों को बेचने का आरोप लगाया है। उधर इस मामले के बाद में अस्पताल और डाक्टर की तमाम खामियां भी उजागर होने लगी हैं।
आजमगढ़ जिले के रहने वाले कमलेश वर्मा 12 मई को अपने नवजात बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती कराये। पास में ही एक बच्ची का भी इलाज चल रहा था। बच्चे की मां जब अपने बच्चों को दूध पिलाने गई तो डायपर बदलने पर देखा कि बच्चा नहीं वह तो बच्ची है। इसके बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बदले हुए बच्चे की फ़िल्मी अंदाज में तलाश शुरू कर दी जो की जिले के तरवां थाना क्षेत्र के रासेपुर बोंगरिया के कंचनपुर गांव चला गया था। इस पूरे मामले में रेनबो हॉस्पिटल की बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कमलेश वर्मा के दोस्त बिजली ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन मामले को रफा दफा करने का दबाव बना रहा है। वहीं दोस्त ने कहा कि हमारा बच्चा स्वस्थ था, हम दूसरे के बच्चे का इलाज का पैसा दे रहे थे। इसके साथ ही 520 रुपया इलाज के लिए प्रतिदिन लिया जा रहा था। जबकि आयुष्मान कार्ड लगाया गया था। वहीं पिता कमलेश वर्मा भी अपनी गरीबी का हवाला देते हुए कह रहा कि पाई-पाई इकट्ठा करके बच्चे का इलाज कर रहा हूं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने मामला बिगड़ता देख बच्चे के पिता को अपने प्रभाव में ले लिया है। जब तक बच्चा नहीं मिला था तब तक पिता बहुत परेशान था, जबकि बच्चा मिलने के बाद पिता को किसी से मिलने भी नहीं दिया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर के इन बड़े नामी अस्पतालों की असलियत क्या है। वही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आजमगढ़ सीओ सिटी शुभम तोदी ने बताया कि वायरल वीडियो से यह जानकारी मिली है की सिधारी स्थित निजी अस्पताल में भ्रम बस बच्चा बदल गया है वर्तमान की स्थिति में अब बच्चा उनके सही अभिभावकों को सौंप दिया गया है अगर कोई थाने पर अप्रोच होता है तो विधिक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
