दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
तथाकथित फर्जी दानपत्र के आधार पर मदरसे की मान्यता लेने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंड पीठ ने रजिस्ट्रार मदरसा परिषद के मदरसे की मान्यता निलंबित करने के आदेश और क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इस मामले में शिकायतकर्ता हाज़ी इमाम अली ने मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ में शिकायत की थी कि मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता एक फ़र्ज़ी दानपत्र के आधार पर ली गई है। इस शिकायत पर मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर के प्रबंधक ज़हीन अहमद की तरफ से प्रस्तुत जवाब को संतोषजनक न पाते हुए मदरसा परिषद के रजिस्ट्रार ने 20 अगस्त 2026 को मदरसे की मान्यता निलंबित कर दिया। बाद में मदरसे के प्रबंध समिति के तत्कालीन तथा वर्तमान सदस्यों के विरुद्ध एफआईआर का आदेश भी दे दिया। निलम्बन के इस आदेश के विरुद्ध मदरसे के प्रबंधक ज़हीन अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट दायर किया। याचिका में कहा गया कि रजिस्ट्रार द्वारा केवल दो ही परिस्थितियों में किसी मदरसे को निलंबित किया जा सकता है। पहले जब मान्यता की शर्तों का अनुपालन न किया जाए और दूसरा मदरसा बोर्ड के आदेश का अनुपालन न किया जाए। प्रबंध समिति के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट का ध्यान उस तरफ भी दिलाया कि वर्ष 2010 में जब मदरसे को अनुदान पर लेने की कार्यवाही चल रही थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने मदरसे का भौतिक निरीक्षण करने के बाद ही मदरसे को अनुदान पर देने की संस्तुति की थी। अब बिना किसी स्थलीय निरीक्षण के ही मान्यता निलंबित कर दी गई। जब शिकायतकर्ता की तरफ से फर्जी दानपत्र की बात कही गई तो अदालत ने कहा कि इसमें बाद में विचार करेंगे कि यह दानपत्र वैध या अवैध है। फिलहाल मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने रजिस्ट्रार मदरसा परिषद के निलंबन आदेश 20 अगस्त 2026 के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत ने विपक्षी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

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