
दैनिक भारत न्यूज
आजमगढ़।
विवाहिता की हत्या किए जाने के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को पचास हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि मृतका के पिता को दी जाएगी। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा मदन लाल निवासी निजामुद्दीनपट्टी थाना सरायमीर की पुत्री विमला का प्रेम संबंध गांव के ही हरेंद्र से हो गया। जिसकी जानकारी होने पर सरायमीर थाने पर पंचायत हुई और इस पंचायत में 22 फरवरी 2015 को हरेंद्र और विमला का विवाह संपन्न हुआ। इस विवाह को हरेंद्र के घर वाले स्वीकार नहीं करते थे और विमला के मायके वालों से दहेज की मांग करने लगे। एक लाख रूपये तथा मोटर साइकिल की मांग को लेकर 14 मई 2017 को पति हरेंद्र, जेठ कलेन्द्र, देवर राजेन्द्र, ससुर भोपाल तथा सास दुर्गावती ने विमला को बुरी तरह से मारापीटा। सूचना पाकर पहुंचे विमला के पिता ने पहले संजरपुर स्थित निजी अस्पताल में फिर 15 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान 25 मई 2017 को विमला की मृत्यु हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्रा तथा विश्व दीपक श्रीवास्तव एडवोकेट में कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी हरेंद्र, राजेंद्र, कलेन्द्र, भोपल तथा दुर्गावती को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को पचास हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
