दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
मामूली विवाद में पिता की गैर इरादातन हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने आरोपी बेटे को दस वर्ष की कैद तथा दस हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई।जबकि इस मुकदमे में आरोपी बहू को पर्याप्त सबूत के अभाव में दोष मुक्त कर दिया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 3 जैनेंद्र कुमार पांडेय ने बुधवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार बिलरियागंज थाना क्षेत्र की शांतिपुर पथरपुरवा गांव में 21 जुलाई 2018 की रात लगभग 8:00 बजे जगपत राम का अपने लड़के रामजतन और बहू सविता से कहा सुनी हो गई। इसी विवाद पल बात बढ़ जाने पर रामजतन और सरिता ने लाठी डंडा से जगपत को बुरी तरह से मारा। जगपत को बचाने आई उनकी पत्नी सुशीला देवी को भी लाठी डंडे से मारा पीटा और घर में ताला बंद करके बाहर चले गए। दूसरे दिन जब सुबह जगपतराम के दूसरे लड़के रामबचन ने ताला खोला। तब तक जगपत की मृत्यु हो चुकी थी। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के लिए दोनों आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी पुत्र रामजतन को दस वर्ष के कारावास तथा दस हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त सबूत के अभाव में आरोपी बहू सरिता को दोष मुक्त कर दिया।

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