
रिपोर्टः अरुण यादव
आजमगढ़।
कंधरापुर थाना क्षेत्र के मिरिया गांव में बीते पांच अप्रैल को आयोजित मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तो सकुशल संपन्न हो गया, लेकिन प्राइवेट लाइनमैन मुन्ना प्रजापति की इहलीला ही समाप्त हो गयी। उनके परिवार के समक्ष पेट की आग बुझाने की समस्या उत्पन्न हो गयी है। मुन्ना सीएम के कार्यक्रम से पूर्व वहां की बिजली व्यवस्था दुरूस्त कर रहे थे।
मृतक मुन्ना प्रजापति पुत्र स्वर्गीय लालचंद, ग्राम गौरीनारायणपुर के निवासी थे और वर्ष 2016 से आजमपुर पावर हाउस पर संविदा लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार 5 अप्रैल की दोपहर लगभग 2 बजे मुन्ना प्रजापति कंधरापुर थाना क्षेत्र के मिरिया गांव में बिजली ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े थे। तभी अचानक खंभे का निचला हिस्सा टूट गया और वे सीधे जमीन पर आ गिरे। गिरते ही उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे बेहोश हो गए।
हादसे के तुरंत बाद परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने रेफर कर दिया। उन्हें आजमगढ़ के बैठौली स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां हालत में सुधार न होने पर 7 अप्रैल को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
परिजन उम्मीद लेकर उन्हें लखनऊ ले गए, लेकिन सरकारी अस्पताल में भर्ती न हो पाने के कारण मजबूरन निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। लगातार इलाज और बढ़ते खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह हिला दिया। इलाज के दौरान लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद कोई खास सुधार नहीं हुआ। आखिरकार आर्थिक तंगी से जूझते हुए परिजन 13 अप्रैल को उन्हें फिर जिला अस्पताल आजमगढ़ लेकर आए, जहां जिंदगी की आखिरी जंग लड़ते हुए सोमवार 13 अप्रैल की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुन्ना अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में हर आंख नम है।
इस दर्दनाक घटना ने बिजली विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
