
दैनिक भारत न्यूज
आजमगढ़।
लगभग 19 वर्ष पूर्व रानी की सराय थाना क्षेत्र के रूदरी गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने नौ आरोपियों को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को चौहत्तर हज़ार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं इस मामले के क्रॉस केस कातिलाना हमले के मुकदमे में छह आरोपियों को पांच वर्ष के कारावास तथा प्रत्येक को उनतीस हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक कमलापति ने गुरुवार को सुनाया। इससे पूर्व कोर्ट ने सोमवार को सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था।वादी मुकदमा रामजन्म सिंह निवासी रुदरी थाना रानी की सराय 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन सुबह नौ बजे अपने दरवाजे पर बैठे हुए थे।तभी गांव के प्रधान विपिन सिंह, राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ़ रणविजय,बलवंत सिंह, राधेश्याम सिंह,छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, अरविन्द सिंह,जीवन प्रकाश तथा शिवदास सिंह हथियारों से लैस हो कर दरवाजे पर आ गए। विपिन सिंह के ललकारने पर यह लोग उत्तर की तरफ भागे ।तभी विपिन ने तालुकदार सिंह को गोली मार दी और राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को गोली मार दिया शेष लोगों ने रामजन्म सिंह भतीजे अंकित सिंह और आशीष को लाठी डंडे से मारा मौके पर ही तालुकदार और पारसनाथ सिंह की मृत्यु हो गई। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में प्रेषित किया। दौरान मुकदमा आरोपी राधेश्याम सिंह की मृत्यु हो गई।इस मामले अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडेय तथा विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह की तरफ से कुल तेईस गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी बिपिन सिंह,, राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ़ रणजीत सिंह,बलवंत सिंह, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, अरविन्द सिंह,जीवन प्रकाश तथा शिवदास सिंह को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को चौहत्तर हज़ार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं दूसरी तरफ बिपिन सिंह ने भी कातिलाना हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसके अनुसार आरोपी रामदरस, आशीष सिंह,अंकित सिंह,दीपक सिंह और रामजन्म सिंह ने उनके समर्थक बलवंत तथा अरविंद को बुरी तरह से मारा पीटा और असलहों से फायर किया जिससे वादी विपिन सिंह के पैर में गोली लगी।इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल तेईस गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी रामदरस, आशीष सिंह,अंकित सिंह,दीपक सिंह और रामजन्म सिंह को पांच वर्ष के कारावास तथा प्रत्येक को उनतीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
