आशीष तिवारी

आजमगढ़।
दशकों से जर्जर अहरौला- कप्तानगंज मुख्य सड़क मार्ग की दसा में अब तक सुधार नहीं हो सका। जबकि इस सड़क की मरम्मत के लिए क्षेत्र के लोगों ने दर्जनों बार प्रदर्शन, भूख हड़ताल, अधिकारियों के आफिस का चप्पल तक घीस डाले। क्षेत्र के 55 लोगों पर केस दर्ज कर अपराधी बना दिया गया, लेकिन सड़क की मरम्मत अब तक नहीं हो सकी। गुरुवार को पुनः इस सड़क के मरम्मत की मांग करते हुए जन आंदोलन शुरू हुआ है। अब लोग आरपार का मुड बनाकर उतरे हैं।
इस दौरान बस्तीभुजबल बाजार में समाजसेवी लक्ष्मी चौबे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी, किसान व क्षेत्रीय नागरिक विरोध प्रदर्शन पर उतर गए। लोक निर्माण विभाग के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन व नारेबाजी की गयी। आंदोलित लोगों के मुताबिक इस सड़क से लोग आना छोड़ दिये हैं। हम लोगों का व्यवसाय चौपट हो रहा है। आने वाले समय में बाजार को बंद कर एक दिवसीय सांकेतिक धरने पर व्यापारी और किसान बैठेंगे। अगर फिर भी शासन प्रशासन इसमें सक्रिय भूमिका नहीं करता है तो आने वाले समय में व्यापारी और किसान व क्षेत्रीय नागरिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे। फिर आगे की रणनीति तैय होगी।
अहरौला कप्तानगंज 21 किलोमीटर मार्ग जनपद में पहेली बना हुआ है। यहां तक की 2024 लोकसभा चुनाव में अचार संहिता से पहले अहरौला कप्तानगंज सड़क को लेकर टेंडर भी जारी कर दिया गया, और फिर चुनाव बीते बीतते टेंडर निरस्त कर दिया गया। फिर सड़क को प्रधानमंत्री सड़क योजना में बजट के लिए प्रस्ताव भेजने की बात सामने आई. विभागीय सूत्रों की मानें तो वह भी प्रस्ताव नहीं हो पाया और फाइल वापस हो गई। एक बार फिर 40 करोड़ की लगा से नाबार्ड से सड़क के सुदृढ़ीकरण कराने की बात सामने आई आ रही है. जिससे यह पूरा सड़क बीते 6 साल से पहेली बनी हुई है। इस सड़क पर चलना इतना कठिन हो गया है कि हल्की सी बारिश होने पर पता ही नहीं चलता कि सड़क में तालाब है या तालाब में सड़क है। सड़क में डेढ़ से दो फिट के गढ्ढे बने हैं। सड़क की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं। आए दिन इस पर से स्कूल जाने वाले बच्चों के कपड़े खराब होते हैं। बड़ी गाड़ियों के चलते राहगीरों के कपड़े खराब हो जाते हैं। दुर्घटना कब और किस सड़क के गड्ढे में हो जाए यह पता ही नहीं। 21 किलोमीटर की सड़क में हर फीट पर बड़े-बड़े गड्ढ बने हुए हैं, जो हल्की सी बरसात होने पर सड़क को शैलाब बना देते हैं। विधानसभा में सड़क को लेकर सवाल भी उठाया गया है। अब एमएलसी रामसूरत राजभर ने इस सड़क को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत कराया। 2020-21 में सड़क के बनाने की मांग करने पर पांच नामजद और 50 अज्ञात पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। फिर भी सड़क नहीं बनी, दर्जनों बार आंदोलन भूख हड़ताल से लोग गुजर चुके हैं फिर भी आश्वासन के बाद सड़क नहीं बनी। प्रदर्शन करने वालों में लक्ष्मी चौबे, पंकज चौबे, डॉ प्रेम नारायण, राजू मोदनवाल, रविशंकर, डॉ राहुल, प्रमोद मोदनवाल, राजेंद्र गुप्ता, ओम प्रकाश तिवारी, होरीलाल शर्मा, मेवालाल सोनी, आदि लोग मौजूद रहे।

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