अरुण यादव

आजमगढ़।
शनिवार को लोकसभा चुनाव का विगुल बजने के साथ ही समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ के लोगों में काफी दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आजमगढ़ सीट से अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतार दिया। सपा ने धर्मेंद्र के अलावा अन्य छह और सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है, लेकिन आजमगढ़ के प्रत्याशी की चर्चा जोरों पर है।
आजमगढ़ को सपा का गढ़ कहा जाता है। साल 2014 से यहां की बागडोर स्व. मुलायम सिंह यादव के परिवार में थी। मुलायम के बाद यहां के सांसद सपा प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे, लेकिन यूपी के विधानसभा में मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाने और सरकार को घेरने के उद्देश्य से अखिलेश ने सांसद पद से इस्तिफा दे दिया। इसकी वजह से खाली हुई सीट पर सपा की तरफ से अखिलेश ने अपने छोटे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा। हालांकि धर्मेंद्र को कड़ी टक्कर देते हुए भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने मैदान मार लिया। सपा के गढ़ में भाजपा ने निरहुआ के रुप में आजमगढ़ में एक नया कद्दावर नेता पा लिया। हालांकि उप चुनाव में हुई करारी हार से तिलमिलाई सपा पुनः आजमगढ़ की सीट पर कब्जा जमाने और उप चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए सपा ने पुनः धर्मेंद्र यादव को मौका दिया है। छटे चरण में होने वाले इस चुनाव में आजमगढ़ की सीट पर सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

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