दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर के न्यू सेमिनार हॉल में शुक्रवार को “पूर्वांचल का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अवदान : आजमगढ़ के विशेष संदर्भ में” अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अमेरिका से पधारी डॉ. मीरा सिंह, मुख्य वक्ता डॉ. शिवकुमार निगम तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक त्यागी व प्रो. प्रभाकर सिंह रहे। मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर व दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि सुषमा पांडे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा—
“आज विश्व हिंदी की ताकत को पहचान चुका है। यह विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। प्रयास हो कि इसे विश्व की दूसरी भाषा का दर्जा मिले। विदेश यात्राओं के दौरान भी मैंने अनुभव किया है कि गाजा पट्टी और गल्फ देशों में 50 प्रतिशत लोग हिंदी जानते हैं। यदि हिंदी को सशक्त बनाना है तो पहले स्थानीय भाषाओं को सम्मान देना होगा।”
मुख्य अतिथि डॉ. मीरा सिंह ने कहा—
“पूर्वांचल की सोहर और लोकगीत परंपरा यहां की सांस्कृतिक धरोहर है। हिंदी पूरी तरह रोजगार परक भाषा है। प्रधानमंत्री द्वारा विदेश यात्राओं में हिंदी का प्रयोग करना गौरव की बात है।”
प्रो. दीपक त्यागी ने कहा—
“आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आजमगढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब और भक्ति आंदोलन की परंपरा विशेष महत्व रखती है। यह धरती हरिऔध, राहुल सांकृत्यायन, कैफी आज़मी और वीर कुंवर सिंह जैसे विभूतियों की कर्मभूमि रही है।”
प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा—
“आजमगढ़ की धरती राष्ट्रवाद, साम्यवाद और मार्क्सवाद की विचारधारा की जननी रही है। यहां का साहित्य सीमाओं में नहीं बंध सकता। पूर्वांचल की हिंदी की खुशबू अब विदेशों तक फैल चुकी है।”
अंत में विश्वविद्यालय कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. गीता, प्रो. हसीन खान, प्रो. अखिलेश, डॉ. नीतू, डॉ. अतुल, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. अवनीश, वैशाली, डॉ. प्रियंका, नितेश अग्रहरि, मनीषा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निधि सिंह ने किया।

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