
दैनिक भारत न्यूज
आजमगढ़।
हमारा संविधान भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का दर्पण है। हमारे महान संविधान निर्माताओं ने हमारे पौराणिक धर्मग्रंथो के उच्चतम आदर्श को अपनाते हुए दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान बनाया। यह बात न्यायमूर्ति पीके गिरी ने कही।
वे शनिवार को दीवानी बार एसोसिएशन के सभागार में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में अधिवक्ता परिषद के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत दुनिया को रास्ता दिखाने वाली है। हमारे प्राचीनतम मनीषियों ने हमारे धर्मग्रंथो में उन आदर्शों व्याख्या की। जिसे आधुनिक दुनिया अपना रही हैं। वृद्ध माता पिता की देखभाल, कमजोर व असहाय की सुरक्षा, सबके लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता, भात्रित्व की भावना इन आदर्शो को हमारे पौराणिक धर्मग्रंथो काफी महत्व दिया गया। हमारा संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है जो नागरिकों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश राय, काशी प्रांत के उपाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, बार के अध्यक्ष वीरेंद्र यादव व मंत्री नीरज द्विवेदी, अधिवक्ता परिषद के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, उपाध्यक्ष दिवाकर सिंह , महामंत्री पीयूष कुमार राय, पंकज सिंह, राधेश्याम मालवीय,रूपा गुप्ता, डी जी सी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक शासकीय अधिवक्ता, संजीव सिंह, पूर्व मंत्री राजेश कुमार सिंह पाराशर ,दीवानी बार के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिंह,आदि बहुत से अधिवक्ता उपस्थित रहे।
