
पहली फिल्म निर्माता निर्देशक स्व. सतीश कौशिक बनाए थे फिल्म कागज
दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो
आजमगढ़।
तमाम लड़ाईयों के बाद सरकारी अभिलेखों में जिंदा हुए मृतक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल बिहारी के जीवन पर दूसरी फिल्म बनने जा रही है। इससे पूर्व फिल्म निर्माता निर्देशक और कलाकार स्व. सतीश कौशिक फिल्म कागज बना चुके हैं। उनकी दूसरी फिल्म का नाम इन्सान और इंसानियत नाम होगा। जो जल्द बननी शुरू हो जाएगी।
मुर्दा सुप्रीमकोर्ट से हाराः
बता दें कि 47 वर्षों से अभिलेखों में मृत घोषित किये गए लाल बिहारी मृतक दागी की सत्य घटना पर आधारित जीवन संघर्ष की कहानी पर दूसरी फिल्म बनाने के लिए कई प्रोडक्शन के निर्देशक, निर्माता की नजर लगी हुई है। पूर्व में अधूरी कहानी पर स्व. सतीश कौशिक फिल्म निर्देशक व अभिनेता सलमान खान के प्रोडक्शन ने कागज़ फिल्म बना चुके हैं। जिसमें कागज़ फिल्म के सह निर्देशक विजय भारत थे। जिन्दा मुर्दा लाल बिहारी मृतक पर कहानी फिल्म लेखक इम्तेयाज हुसैन के साथ में सह निर्देशक विजय भारत द्वारा फिल्म इन्सान और इंसानियत में सहयोग दे रहे हैं। इनके द्वारा कागज़ फिल्म बनाने का फैसला फिल्म अस्तित्व, फिल्म वास्तव, फिल्म गुलाम ए मुस्तफा, फिल्म इस रात की सुबह, फिल्म स्टंट मैंन, फिल्म दिल आसना है, फिल्म परिंदा, हॉलीवुड फिल्म लाइन ऑफ़ डिसेंट आदि लिख चुके हैं।
खुद को जीवित करने के लिए किया संर्घषः
लाल बिहारी जीवित होने के लिए चुनाव आयोग, विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़े, लेकिन जिन्दा मुर्दा की सरकारी दोनों फाइलों को साशन-प्रसाशन की मिली भगत से जिला अभिलेखागारों व तहसीलों से गायब कर सबूत को मिटा दिया गया है। भ्रष्ट अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा झूठी रिपोर्ट कोर्ट को आख्या देकर न्यायालय को गुमराह किया गया है। जिसके आधार पर हाईकोर्ट खंडपीठ लखनऊ ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर मुकदमा ख़ारिज कर दिया गया। 25 करोड़ का हर्जा-खर्चा मानहानि का मुआवजा तो नहीं मिला, लेकिन जुर्माना लगाकर दागी बना दिया गया और उसी साक्ष्य के आधार पर सुप्रीमकोर्ट ने भी 10 हजार रूपये जुर्माना को ख़ारिज करते हुए मुकदमा भी ख़ारिज कर दिया।
लाल बिहारी ने बताया की दिनांक- 30-07-1976 से 30 जून 1994 तक 18 साल अभिलेखों में सरकार व जिला प्रसाशन ने मृत घोषित किया था। अपने साथ-साथ मृतक संघ के बैनर तले हजारों-हजार जीवित मृतकों और धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार,अन्याय से पीड़ितों को उनके जमीनों,मकानों पर न्याय दिलाकर सामाजिक न्याय मानवधिकारों की रक्षा किया गया है। 18 साल तक हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में मुकदमा लड़ा और हार गया। कागज फिल्म बनाने के बाद अब लाल बिहारी मृतक दागी के अनोखे कहानी पर जल्द फिल्म बनने वाली है। उनके जीवन पर किताब भी उनके परिवार सहित अन्य लोग लिख रहे हैं।
