
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए सरकार को सौंपी गयी रिपोर्ट
दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली।
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए गठित समिति ने ड्राफ्ट रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। 800 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम सिफारिश भी की गई है। सभी धर्मों की महिलाओं के लिए पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, शादी और तलाक के लिए एक जैसे नियम, बहुविवाह पर रोक जैसे प्रवाधान को बनाने की सिफारिश की गई है। यूसीसी कमिटी के एक सदस्य ने सलाह दी है कि लिव इन रिलेशनशिप के मामले में रजिस्ट्रेशन/सेल्फ डिक्लरेशन को अनिवार्य किया जाए। समिति ने हलाला, इद्दत, ट्रिपल तलाक को सजा योग्य अपराध बताने की सिफारिश की है। इस्लाम में ‘हलाला’ एक ऐसी प्रथा है जिसके तहत एक तलाकशुदा पत्नी को यदि पति से दोबारा स्वीकार करना चाहता है, तो महिला को किसी अन्य पुरुष से निकाह करके उसे तलाक देना पड़ता है। इद्दत के तहत एक मुस्लिम विधवा या तलाकशुदा महिला को दोबारा शादी करने से पहले एक निश्चित अवधि बितानी पड़ती है।
समिति ने यह भी सलाह दी है कि सभी धर्मों में शादी के लिए लड़कियों की न्यूनतम उम्र 18 और लड़कों के लिए 21 होनी चाहिए। भारत में शादी के लिए निर्धारित उम्र 18 और 21 ही है। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ यौवन प्राप्त कर चुकी किसी भी लड़की की शादी के योग्य मानता है। इस्लामिक कानून के मुताबिक स्वस्थ दिमाग वाला कोई भी मुस्लिम निकाह कर सकता है। जिसने यौवन प्राप्त कर लिया है। केंद्र सरकार ने सभी धर्मों में विवाह की उम्र समान करने के मकसद से बिल पेश किया था। लेकिन बाद में इसे संसद की स्टैंडिंग कमिटी के पास भेज दिया गया था। हालांकि बिल में जनसंख्या नियंत्रण पर कुछ नहीं है।
यूसीसी कमिटी के सदस्य ने बताया कि ड्राफ्ट रिपोर्ट में एक से अधिक विवाह पर रोक की भी सिफारिश की गई है। हालांकि, अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से छूट देने का सुझाव दिया है, क्योंकि संविधान उन्हें विशेष दर्जा प्रदान करते उत्तराखंड में 2.89 फीसदी अधिसूचित आदिवास आबादी है। कुल 5 अधिसूचित जनजाति हैं जिनमें भोटिया, बुकसा, जौनसारी, राजी और थारू शामिल हैं। इनकी अधिकतर आबादी चार जिलों ऊधमर्पा नगर, देहरादून, पिथौड़ागढ़ और चमोली में हैं। ड्रा बिल 4 वॉल्यूम, 400 सेक्शन में विभाजित है।
पहले वॉल्यूम में ड्राफ्ट रिपोर्ट है जबकि दूसरे में ड्राफ्ट कोड इंग्लिश में हैं। तीसरे में जनता से परामर्श की रिपोर्ट और चौथे में दिल्ली में ड्राफ्ट कोड है। सदस्य ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहला कानून है जो पूरी तरह हिंदी में है और इसमें उर्दू का कोई शब्द नहीं।
