अभिषेक कुमार

अलीगढ़।
आगामी एक जुलाई 2024 का दिन भारतीय कानून व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा। क्योंकि इस दिन अंग्रेजों के बनाए गये कानून की धाराओं का नंबर, नाम और सजा का प्रावधान बदल जाएगा।
गौर करें तो 1860 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में भाजपा सरकार ने 16 दशक बाद 2023 में व्यापक बदलाव किया है। जिसमें सिर्फ धाराएं ही नहीं बदलीं बल्कि सजा और जुर्माने के प्रावधान में भारी भरकम बदलाव किया गया है। आने वाले समय में लोगों की जुबान पर रटने वाली 302 हत्या अब 103 (1), ठगी या धोखाधड़ी 420 अब 118 (4), चोरी 379 अब 303 (2) व दुष्कर्म 376 आईपीसी अब 64 बीएनएस कहलाएंगी। आने वाले समय में अब इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होगा।

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आईपीसी की 511 धाराएं अब बीएनएस में 356 धाराः

अलीगढ़ के अधिवक्ता प्रमोद कुलश्रेष्ठ ने बताया कि 1860 की आईपीसी आने वाले दिनों में गुजरे हुए जमाने की तरह हो जाएगी, क्योंकि एक जुलाई से सरकार बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू कर रही है। आईपीसी में 511 धारा थी, जबकि बीएनएस में 356 धारा हैं। 175 धाराएं बदल गई हैं। बदलाव के तहत 8 नई धाराएं जोड़ी गईं हैं। जबकि 22 धाराएं खत्म हो जाएंगी। इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं हैं। सीआरपीसी में पहले 484 धारा थीं। इनमें 160 धाराएं बदली गईं हैं। नौ नई धाराएं जोड़कर नौ को खत्म कर दिया गया है। इसमें पूछताछ से ट्रायल तक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रावधान हो गया है। जबकि यह पहले नहीं था।

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बम धमाका करने वाले तत्काल जाएंगे जेलः

अंग्रेजों के समय के कानून 124 (क) आईपीसी को नए कानून के तहत खत्म कर दिया गया है। उसकी जगह देशद्रोह कर दिया गया है। लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना कोई भी कर सकता है। लेकिन किसी ने सशस्त्र विरोध, बम धमाका करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, उसे आजाद रहने का हक नहीं, उसे जेल जाना ही पड़ेगा। अलीगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता मुंतजिम किदवई ने बताया कि सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में करीब चार से पांच करोड़ केस लंबित हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं। ऐसे में नए कानून के तहत नए नियमों का पालन होगा। कोर्ट में जज की संख्या का कम होना भी केस लंबित होने का कारण है। बताया कि लगभग साढ़े चार से पांच हजार जज के पद खाली हैं।

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इन धाराओं को अब इस नाम से जाना जाएगाः

हत्या 302, अब 103 (1) हो जाएगी।

जान से मारने का प्रयास 307, अब 109 होगी।

गैर इरादतन हत्या 304 (ए), अब 106 होगी।

दहेज हत्या 304 (बी), अब 80 हो जाएगी।

भ्रूण हत्या 313 को बदलकर 89 कर दिया गया है।

आत्महत्या को उकसाना 306 की जगह अब 108 लगेगी।

लूट 309(ए) होगी।
अश्लील हरकत 354 अब 79 होगी।

अभद्रता व छेड़छाड़ 294 की जगह 296 लिखा जाएगा।

अपहरण 363, अब 137(2),
नाबालिग को भगाना 366 की जगह 87 हो जाएगा।

दुष्कर्म 376 की बजाय 64 लिखा जाएगा।

सामूहिक दुष्कर्म 376 डी अब 70(1) हो जाएगी।

चोरी 379 की जगह 303(2) लिखा जाएगा।

डकैती 395, की जगह 310(2) लिखा जाएगा।

धोखाधड़ी 420 की बजाय 118(4) होगा।

घर में घुसकर मारपीट 452 को 333 लिखा जाएगा।

दहेज मांगना 498 ए, की बजाय 85 लिखेंगे।

मानहानि 500 को 556(2) लिखा जाएगा।

गाली देना 504 की जगह 352 लिखा जाएगा।

धमकी देना 506 को 351(2) (3) लिखेंगे।

मारपीट 323 की घटना 115 (2) में लिखा जाएगा।

बरामदगी 411 को 317 (2) कहा जाएगा।

सरकारी कर्मी से मारपीट 353, की जगह 132 लिखेंगे।

12 से कम बालिका से रेप 376 क ख को 65 (2) में केस लिखा जाएगा।

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