
तरवा बाजार में आयोजित श्रीमत् भगवत कथा में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का हुजूम
रिपोर्टः संजय पांडेय
तरवा ( आजमगढ़ )।
स्थानीय बाजार में स्थित आरपीएम वाटिका में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन चल रहा है। भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को पंच निमोहि पीठाधीश्वर परम श्रद्धेय श्री श्री 108 आचार्य श्री राधेय जी महाराज वृंदावन ने प्रवचन करके श्रोताओं को भगवान कथा का अमृत पान कराया।
कहा की जो मनुष्य को भय, मुक्ति और कष्ट से छुटकारा दिलाकर भवसागर पार कर दे। कष्ट में हमारी सुने, दया करे उसे भगवान कहते हैं। उन्होंने शब्द के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए कहां की मन की शुद्धि प्रार्थना से होती है। भगवान को पाने के लिए आठ नियम है। जिसमें प्राणायाम प्रमुख है। मनुष्य के अंदर संघर्ष होने की क्षमता ईश्वर के ही प्रेरणा से आती है। सत्कर्म का लाभ मनुष्य को जरूर मिलता है। सत्य हमेशा सत्य होता है, असत्य हमेशा असत्य ही होता है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को आसन पर भोजन करना चाहिए, तथा आसन पर पूजा करना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में एक सिद्धांत वसूल बनाना चाहिए। जिसके मार्ग पर वह अपना जीवन निर्धारित कर सके। उन्होंने मनुष्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में सब कुछ ईश्वर है, ईश्वर से बड़ा कुछ भी नहीं है। मनुष्य को कर्म करना चाहिए तो ईश्वर फल देता है। अंत में इस कथा में आए हुए लोगों का आभार प्रकट करते हुए आयोजन प्रदेश कार्य समिति के सदस्य अखिलेश कुमार मिश्रा उर्फ गुड्डू ने कहा कि इस क्षेत्र के लिए यह भागवत कथा वरदान साबित होगी।
