वर्षों से बंद पड़ी परदहा कॉटन मिल की 85 एकड़ ज़मीन पर होगा औद्योगिक विकास

48 करोड़ रुपये के खर्च से बनेगा भव्य औद्योगिक पार्क

8.5 करोड़ रुपये की देनदारी को सरकार ने किया माफ़

मऊ की बंद पड़ी कताई मिल की भूमि पर बनेगा औद्योगिक आस्थान

दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो

लखनऊ।
मऊ का पुराना औद्योगिक संकुल जो कई दशकों से बंद पड़ा था उसकी जगह नया विश्व स्तरीय औद्योगिक संकुल स्थापित करने के लिए लगातार मांग की जा रही थी। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ जिला में औद्योगिक विकास की मुहर लगा दिए हैं।
मंत्री ए.के. शर्मा के आग्रह और प्रयासों को सरकार द्वारा स्वीकार करने पर कई वर्षों से बंद पड़ी परदहा कॉटन मिल की 85 एकड़ ज़मीन पर औद्योगिक संकुल के विकास होगा।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह मऊ ज़िले के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि, मऊ जिले की पहचान कही जाने वाली परदहा कॉटन मिल और स्वदेशी कॉटन मिल थी जो कि पहले की सरकारों की उपेक्षा का शिकार होकर कई वर्षों से बंद पड़ी थी। परदहा कॉटन मिल की 85 एकड़ ज़मीन पर औद्योगिक संकुल के विकास के लिए कई महीनों से राज्य सरकार में विविध स्तर पर प्रयास किया गया। अब इसकी सारी औपचारिकता पूर्ण हो गई है। लगभग 48 करोड़ रुपये के खर्च से एक भव्य औद्योगिक पार्क (एमएसएमई क्लस्टर) बनाने की मंज़ूरी सरकार ने दे दी है। इस ज़मीन पर 8.5 करोड़ रुपये की देनदारी को भी सरकार ने माफ़ कर दिया है। गुरुवार को सीएम
ने इस पार्क का ऑनलाइन शिलान्यास किया है।
बता दें कि निकाय चुनाव 2023 के दौरान आयोजित जनसभा को संबोधित करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी मऊ पहुंचे थे। मंच से मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आग्रह करते हुए कहा था कि 1960-70 के दशक में मऊ टेक्सटाइल और बुनाई का केंद्र हुआ करता था। समयांतर में 1959 में स्वदेशी कॉटन मिल की स्थापना हुई थी। उसी के आसपास परदहा में एक कताई मिल की भी शुरुआत हुई। जो कि पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी है। इन दोनों कताई मीलों ने हजारों लोगों को रोजगार दिया था। वर्तमान में परदहा में लगभग 85 एकड़ जमीन थी जो आज अनुपयोगी पड़ी है। वहीँ स्वदेशी मिल के पास भी 25 एकड़ जमीन है। मंत्री श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया था कि वर्ष 2005-2017 तक के समय की सरकारों की उपेक्षा से इन मिलों के साथ दुर्व्यवस्था की गई। जिससे कि आज यह दोनों मिले बंद हैं। प्रदेश सरकार ने पहले अपने बजट में ही औद्योगिक केंद्र संकुल बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था कर दी थी। वहीँ मंत्री परिषद् ने औद्योगिक इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रदेश में मीडियम स्मॉल और माइक्रो इंडस्ट्रीज लगाने के लिए जगह के बहुत डिमांड बढ़ने लगी है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट हुए करारों के बाद जमीन की उपलब्धता की बहुत डिमांड आई है। जिसके लिए मंत्री परिषद ने यह निर्णय लिया है कि राज्य में कई जगह ऐसी कताई मिली थी, जो इस समय पूरी तरीके से बंद हो चुकी है। मऊ जिले में इस प्रकार से दो मिले हैं। जिनका प्रस्ताव समावेश हुआ और मंजूरी भी मिली।
मंत्री एके शर्मा के प्रयासों को मूर्त रूप देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में औद्योगिक आस्थान (एम०एस०एम०ई० क्लस्टर पार्क) योजनान्तर्गत उ०प्र० स्टेट स्पिनिंग कम्पनी लि० मऊ की निष्प्रयोज्य भूमि पर एम० एस०एम०ई० क्लस्टर पार्क विकसित किये जाने हेतु उप्र लघु उद्योग निगम को कार्यदायी संस्था नामित करते हुये प्रायोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग द्वारा प्रायोजना की आंकलित लागत रूपये 4769.18 लाख पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमोदन प्रदान किया है। योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्राविधानित धनराशि रूपये 2500 लाख के सापेक्ष प्रथम किश्त के रूप में 14 करोड़ 20 लाख 61 हजार रूपये की स्वीकृति मा. राज्यपाल द्वारा प्रदान की गयी है। वहीँ प्रस्तावित निर्माण कार्य जल्द ही प्रारम्भ करने के साथ ही निर्माण कार्य समयबद्धता से कराया जायेगा तथा गुणवत्ता का विशेष रूप से ध्यान रखा जायेगा।

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