
दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो
आजमगढ़।
लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा से पहले ही उठापटक और एक दूसरे दल में नेताओं के आने जाने का क्रम शुरू है। इसीक्रम में मुबारकपुर विधान सभा क्षेत्र से दो बार बसपा के विधायक रहे शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली आखिरकार दूसरे झटके में अपने लिए सपा का दरवाज खोलवा ही लिए। पार्टी की तरफ से भी गुड्डू जमाली का जोरदार स्वागत किया गया।
समाजवादी पार्टी के लखनऊ मुख्यालय में सपा पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने गुड्डू जमाली और उनके साथियों का स्वागत किया।
गुड्डू जमाली ने कहा कि आज ये वक्त की जरूरत है। वह दिल की आवाज सुनकर सपा में आए हैं। मजहब के नाम पर कोई हमें नहीं बांट सकता। गुड्डू जमाली ने कहा कि मुझ पर हिन्दू भाइयों का बड़ा अहसान है। यह इस देश की संस्कृति है। सपा में शामिल होने का फैसला हमारे दिल ने किया है। कहा कि आज की तारीख में यही एक बदलाव की उम्मीद है।
गुड्डू जमाली ने कहा कि अब वह सपा में आ गए हैं और जीवन भर यहीं रहेंगे। कहा कि मैं लालची नहीं हुआ। मैं सौदा नहीं करता हूं। हम लोगों को मजहब के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। हम दिलोजान से पीडीए के लिए लगेंगे। उन्होंने कहा कि बसपा में मैं 13 साल रहा। पार्टी प्रमुख मायावती को भाजपा के खिलाफ लड़ाई में शामिल होना चाहिए था। जब यह नहीं हुआ तो हम लोग क्या करते?
अखिलेश ने किया स्वागतः
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी गुड्डू जमाली का स्वागत किया। अखिलेश यादव ने कहा कि 2022 के चुनाव के पहले गुड्डू जमाली हमारे पास आए थे। किन्हीं परिस्थितियों में हम साथ नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि गुड्डू जमाली को सपा में आकर अपने घर जैसा लगेगा। इस मौके अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। अखिलेश ने कहा कि एक समय में समुद्र मंथन हुआ था। आने वाले लोकसभा चुनाव में संविधान मंथन होगा। अखिलेश ने कहा कि हमें खुशी है कि हमारा पीडीए परिवार बढ़ता चला जा रहा है। हम जितने परिवार बढ़ा लेंगे उतना ही भाजपा को हराने में सफल होंगे।
धर्मेंद्र की जीत में बने थे रोड़ाः
आजमगढ़ उप चुनाव में शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को आजमगढ़ में 2022 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धर्मेन्द्र यादव की हार के लिए काफी हद तक जिम्मेदार बताया जाता है। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सपा उम्मीदवार धर्मेन्द्र यादव को हरा दिया था। सपा का गढ़ कहे जाने वाली आजमगढ़ की सीट पर भाजपा की इस जीत को काफी महत्वपूर्ण माना गया था।
