दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
गैर इरादतन हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने दो आरोपियों को दस – दस वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 160000 रुपए का अर्थ दंड लगाया है। अर्थदंड की आधी धनराशि वादी मुकदमा को दी जाएगी। सजा के समय जब अदालत को बताया गया कि एक आरोपी के छोटे छोटे बच्चे हैं। तब मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए अदालत ने उक्त आरोपी के छोटे बच्चों को देखरेख के लिए शासन को निर्देशित किया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो अमर सिंह ने शुक्रवार को सुनाया।
अभियोजन कहानी के अनुसार वादी मुकदमा प्रमोद यादव निवासी रामपुर हरदसई थाना तरवां की पुरानी दीवाल को 02 मई 2012 को दिन में 11:00 बजे गांव को रविंद्र यादव गिराने लगे। जब वादी मुकदमा प्रमोद में एतराज किया, तब रविंद्र तथा सीता यादव पुत्रगण जोखन यादव, योगेंद्र यादव पुत्र सीता यादव तथा एक नाबालिग़ ने प्रमोद को लाठी डंडा से मारना शुरू कर दिया। जब वादी के घर के राजनाथ यादव, रामाश्रय यादव आदि प्रमोद को छुड़ाने पहुंचे तो हमलावरों ने उन लोगों को भी बुरी तरह से मारा। जिससे राजनाथ को गंभीर चोटें आई। बुरी तरह से घायल राजनाथ कोमा में चले गए और 16 जून 2012 को हॉस्पिटल में राजनाथ की मृत्यु हो गई। इस मुकदमे में जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दिया। एक आरोपी के नाबालिग़ होने के कारण उसके पत्रावली अलग कर दी गई। जबकि एक आरोपी सीता यादव की मृत्यु हो जाने पर दौरान मुकदमा मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अभय दत्त गोंड, हरेंद्र सिंह तथा पूर्व डीजीसी क्रिमिनल दशरथ यादव ने कल 11 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत में आरोपी योगेंद्र यादव तथा रविंद्र यादव को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 160000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी योगेंद्र के छोटे बच्चों की उम्र को देखते हुए शासन को निर्देश दिया कि उनकी उचित देखरेख के लिए आवश्यक कार्रवाई करें वही बीमार चल रहे आरोपी रविंद्र यादव को उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का भी आदेश दिया।

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