

तरवा में आयोजित श्रीमत् भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़े लोग
रिपोर्टः संजय पांडेय
तरवा (आजमगढ़)।
स्थानीय बाजार के आरपीएम वाटिका में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। मंगलवार को तीसरे दिन प्रवचन करते हुए श्री राधेय जी महाराज वृंदावन ने कहा की मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। कर्म का भोग मनुष्य इसी जन्म में भोगता है। जैसे संत कभी बीमार नहीं होता है। वह शिष्यो को दुखी देखकर वह बीमार होता है। कोई भी मनुष्य अगर ईश्वर की आराधना करता है, जब वह एकाग्र होता है, तो ईश्वर जरूर दर्शन देते हैं। संतों का हृदय बाहर से कठोर तथा अंदर से कोमल होता है। जैसे कच्चे नारियल को फोड़िए तो अंदर सफेद दिखाई देता है। इस प्रकार संतों का हृदय होता है। ईश्वर प्रत्येक प्राणी में वास करता है। उन्होंने एक गाना गाते हुए कहा कि जिसकी रचना इतनी सुंदर होगी, वह कितना सुंदर होगा। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को सामने रखकर भक्तों के प्रति यह दोहा सुनाया। उन्होंन कहा कि मनुष्य जब मृत्यु लोक से स्वर्ग लोक जाता है तो वह कुछ पल के लिए एकाग्र होता है और अपनी आंखें खोल के अंतिम समय तक इस दुनिया को जरूर देखता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर पांच तत्वों से बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि पांच पुत्रों के मौत के बाद अश्वत्थामा आज भी कुरुक्षेत्र में 3:15 पर
आते हैं और परिक्रमा करने के बाद वह अपने धाम को चले जाते हैं। उन्होंने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि मनुष्य को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे वह स्वयं पश्चाताप करें। जैसे कि अश्वत्थामा अपने पुत्रों के प्रति पश्चाताप करते हैं। इस भागवत कथा में क्षेत्र के सैकड़ो लोग संत के अमृत बाणी को सुनते हैं। आए हुए लोगों का आयोजन सीमित की तरफ से वरिष्ठ भाजपा नेता अखिलेश कुमार मिश्र उर्फ गुड्डू ने आभार प्रकट किया।

