
दैनिक भारत न्यूज
आजमगढ़।
बिलरियागंज ब्लाक क्षेत्र के पटवध कौतुक गांव में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर परिसर में चल रहे मानस महायज्ञ एवं रामकथा के चौथे दिन आजमगढ़ से आए मानस वक्ता श्री ललित नारायण गिरी ने श्री दुर्वासा ऋषि का वर्णन करते हुए उनकी संपूर्ण गाथाओं को विस्तार से वर्णन किया। आजमगढ़ की धरती पर महर्षियों की उत्पत्ति को श्री राम से जोड़कर अपने वक्तव्य में बताएं। उस समय का वर्णन करते हुए दत्तात्रेय आदि धर्मस्थलों के बारे में ऋषि मुनियों से जोड़कर बताएं। उन्होंने कहा कि भगवान राम विष्णु अवतार होते हुए भी मनुष्य के रूप में मनुष्य को समझने का प्रयास किया। अगर मनुष्य भगवान राम के बने पद चिन्हों पर चलते हुए ऋषि मुनि सहित सबरी से भगवान कैसे मिलते हैं, उनका कैसा प्रेम होता है। मनुष्य को मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि वह राक्षसी प्रवृत्ति धारण करता है। 84 लाख योनि में भ्रमण करने के बाद मनुष्य का जन्म होता है। मनुष्य मृत्यु लोक में आकर सब भूल जाता है कि भगवान से हमने क्या वादा किया था। आए हुए श्रोतागण वक्तव्य को सुनकर भाव विभोर हो जाते हैं। जय श्री राम, जय श्री राम, हर हर महादेव का जयकारा लगाते रहे। यहां पर सुबह से भक्तों का रेला लगा रहता है। लोग यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते हैं। शाम को मानस कथा सुनने का रेला लगा रहता है। लोग सुनने के लिए उपस्थित हो जाते हैं और हर हर महादेव के जयकारों से परिक्रम फेरी करते हैं।
