
दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो
वाराणसी।
केन्द्र व प्रदेश सरकार एक ओर जहां भष्टाचार पर पूरी तरह से अंकुश लगाने का भरपूर प्रयास कर रही है। वही दूसरी ओर भष्टाचार में लिप्त अधिकारी भी तू डाल -डाल मै पात -पात की कहावत को चरितार्थ करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। परिणाम स्वरूप प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सरकारी योजनाओं में भी भष्टाचार के फलीभूत होने का आरोप लग रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में केंद्र व प्रदेश सरकार पूरी ताकत लगाकर चौमुखी विकास का कार्य करा रही है, किन्तु बच्चों व महिलाओं से जुड़ा विभाग बाल विकास एवं पुष्टाहार के तहत संचालित योजनाओं में जिला कार्यक्रम अधिकारी वाराणसी के संरक्षण में भष्टाचार होने का मामला प्रकाश में आया है। इस खेल में आरोप- प्रत्यारोप के कारण तथा पर्दा डालने उद्देश्य से ज्योति मिश्रा नाम की एक संविदा मुख्य सेविका को जिला कार्यक्रम अधिकारी की आख्या पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए निदेशक स्तर से गतदिनों सेवा से बर्खास्त तो कर दिया गया है ,किन्तु यह कार्यवाई कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बर्खास्त मुख्य सेविका ज्योति मिश्रा ने बताया कि जिला कार्यक्रम अधिकारी वाराणसी दिनेश कुमार सिंह ने मेरे सेवा विस्तार सम्बन्धित आख्या भेजने एंव केन्दो से प्रतिमाह वसूली कराकर पैसे देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। जिसका मेरे द्वारा विरोध कर वसूली करने से मना कर दिया गया। जिससे डीपीओ दिनेश सिंह मुझसे नाराज होकर भष्टाचार के कार्य में बाधा मानते हुए मेरे विरूद्ध बिना किसी ठोस साक्ष्य के उच्च अधिकारियों को गुमराह कर मेरे विरूद्ध निदेशक को आख्या भेजकर मेरी सेवा समाप्त करा दिया गया। मैने जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार सिंह के भष्टाचार के सम्बन्ध में उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से पत्र देकर अवगत कराया, किन्तु डीपीओ से विभाग द्वारा कोई भी पूछताछ तक नहीं किया गया और भष्टाचार का विरोध करना मेरे लिए भारी पड़ गया और मेरी सेवा समाप्त हो गयी। जनपद वाराणसी के इस विभाग में फैले भष्टाचार पर जनपद के मुखिया डीपीओ के दोहरे मापदंड व संरक्षण प्राप्त होने के उदाहरण स्वरूप मामला यह है कि बाल विकास परियोजना शहर की एक मुख्य सेविका का घूस लेते विडियो लगभग एक माह पूर्व से खुलेआम वायरल हो रहा है और तीसरा मामला इसी जनपद के बाल विकास परियोजना विघापीठ का है। जिसमें आगनवाड़ी कार्यकर्ती के पति द्वारा बच्चो व महिलाओं को वितरित करने वाले पोषाहार को बाजार में बेचने संबंधित बात-चीत का आडियो भी लगभग दो सप्ताह पूर्व से जारी हो रहा है। दोनों मामले जिला कार्यक्रम अधिकारी के संज्ञान में है, किन्तु कार्यवाई के नाम पर सिर्फ मामलो को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। आम चर्चा है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी के संरक्षण में प्रधानमंती के संसदीय क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण विभाग में भष्टाचार फल फूल रहा है। अब देखना है कि भष्टाचार पर सरकार की जीरो टालरेस नीति के तहत अंकुश लगता है या फिर भष्टाचार के खेल में माहिर अधिकारी छोटी चिड़िया को मारकर अपने कारनामो को ईमानदारी का फर्जी चोला ओढकर छिपाने में सफल होते रहेंगे। लोगों ने सम्बंधित विभाग के उच्चाधिकारियों समेत जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया है।
