दैनिक भारत न्यूज

आज़मगढ़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दस मार्च को महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय का लोकापर्ण किया। अपने लय में आने से पहले ही यह विश्वविद्यालय चर्चा में है। खासतौर से सामान्य लोगों में काफी निराशा है।
महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ में असिस्टेंट प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर के 34 पद हेतु निकाले गए विज्ञापन में एक भी पद अनारक्षित न होने से सामान्य वर्ग के लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है। सामान्य वर्ग के नेट उत्तीर्ण व पीएचडी धारक युवाओं ने आज़मगढ़ में नवनिर्मित महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर बनने का सपना संजोया था।विश्वविद्यालय की बेबसाइट पर असिस्टेंट प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर के लिए निकाले गए विज्ञापन को देखकर सभी युवाओं का सपना चकनाचूर हो गया क्योंकि विश्वविद्यालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 17 पदों में एक भी पद को अनारक्षित की श्रेणी में नहीं रखा है। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर के 17 पदों में भी एक पद को अनारक्षित श्रेणी में नही रखा गया है। 34 पदों में एक भी पद अनारक्षित न होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जिससे सामान्य वर्ग के युवाओं में काफी रोष व्याप्त है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मनमानी ढंग से नियमों को ताख पर रख कर निकाले गए विज्ञापन पर आक्रोश व्यक्त करते हुए समर बहादुर सिंह, विजय प्रकाश पांडेय, कैलाश सिंह सहित कई अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार से इसमें हस्तक्षेप कर निकाले गए विज्ञापन को निरस्त कर पुनः नए सिरे से विज्ञापन निकाल कर नियमानुसार पदों को अनारक्षित करने की मांग किया है। ताकि सामान्य वर्ग के युवाओं को भी आवेदन करने का मौका मिल सके। विश्वविद्यालय में लागू किए गए आरक्षण के फार्मूले को ले कर लोग सामान्य वर्ग के युवाओं से तरह -तरह के चटखारे ले रहे है जिससे युवाओं में राज्य सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

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