बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहानें में ओमप्रकाश का रहा विशेष योगदान, वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. लालबहादुर सिंह ने अदालत में किया था आरोपियों की पैरवी

आशीष तिवारी

आजमगढ़।
पांच सौ साल के लंबे संघर्ष के बाद 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है। लेकिन सनातनियों को यह गौरव दिलाने में आजमगढ़ जिले का विशेष योगदान रहा है। बाबरी मस्जिद विंध्वस के मामेल में अतरौलिया क्षेत्र के रहने वाले ओमप्रकाश पांडेय का जहां विशेष योगदान रहा है। वहीं आरोपियों के पक्ष में विशेष पैरवी करके उन्हें बाइजत्त बरी कराने का विशेष योगदान दीवानी न्यायालय के दिवंगत अधिवक्ता लालबहादुर सिंह का रहा है।
अब जब बात अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन की हो रही है तो पुराने घटनाक्रमों का जिक्र करना जरुरी है। बाबरी मस्जिद विंध्वस मामले में भाजपा के बड़े बड़े नेताओं में आजमगढ़ जिले के अतरौलिया विधान सभा क्षेत्र के रतुआपार गांव निवासी ओमप्रकाश पांंडेय का नाम भी शामिल है। तीन भाईयों में दूसरे नंबर के ओमप्रकाश पांडेय हैं। बचपन से ही श्री राम की सेवा करने का जज्बा था। यही कारण था कि बचपन से ही कारसेवा में जुड़ गए। युवावस्था में ही घरबार छोड़कर टेंट में बिराजमान श्रीराम लला को छत दिलाने के प्रयास में जुट गए। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो उत्साहित कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को विध्वंस कर दिया। उसमें आजमगढ़ जिले के अतरौलिया क्षेत्र के रतुआपार गांव निवासी ओमप्रकाश पांडेय भी थे। यह बात सीबीआई द्वारा 13 दिसंबर 1992 और 26 अगस्त 1993 को अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में जिक्र है। जिसमें चंपत राय, स्व. बाबासाहब ठाकरे, लालकृष्ण आडवानी, कल्याण सिंह, अशोक सिंघल, मुरली मनोहर जोशी, अयोध्या के तात्कालीन डीएम रविंद्रनाथ श्रीवास्तव, तात्कालीन एसपी देवेंद्र बहादुर समेत 143 आरोपित कारसेवकों में आजमगढ़ जिले के रतुआपार गांव निवासी ओमप्रकाश पांडेय का नाम भी शामिल है। हालांकि आज तक ओमप्रकाश पांडेय की ना तो गिरफ्तारी हुई, ना ही अदालत में ही उनकी पेशी हो सकी। अब जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर का 22 जनवरी को उद्घाटन हो रहा है। उसमें शामिल होने के लिए जिन प्रमुख लोगोें को मंदिर प्रशासन की तरफ से निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा। उसमें ओमप्रकाश पांडेय का नाम भी शामिल है। ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि मँदिर उद्घाटन के बाद निमंत्रण मिलने से वे काफी प्रसन्न हैं। ओमप्रकाश ने बताया कि जवानी में किए गए इस अथक प्रयास का फल अब जाकर मिला है। बाबरी मस्जिद विंध्वंस के मामले में जहां ओमप्रकाश पांडेय का विशेष योगदान रहा। वहीं आरोपित किए गए कारसेवकों को मुकदमों की पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. लालबहादुर सिंह का विशेष योगदान रहा। आजमगढ़ जिले के लोगों को इन दोनों महान लोगों पर सदा गर्व रहेगा।

लालबहादुर सिंह का रहा विशेष योगदानः
दीवानी न्यायालय आजगमढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. लालबहादुर सिंह भले ही अब हम लोगों के बीच में नहीं है। लेकिन अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन होने के अवसर पर लालबहादुर सिंह का जिक्र होना लाजमी है। लालबहादुर सिंह अपने वकालत के पेशे मे जहां एक से बढ़कर एक जटिल मुकदमों की पैरवी करके कई आरोपियों को जीवन दान दिला दिया। वहीं अयोध्या में बाबरी मस्जिद विंध्वंस के मामले में विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व महामंत्री स्व. अशोक सिंघल के अधिवक्ता के तौर पर मुकदमे की पैरवी किए थे। लालबहादुर सिंह के बेटे जितेंद्र सिंह ने बताया कि श्रीराम मंदिर उद्घाटन का निमंत्रण अभी तक नहीं मिला है। लोग इंतजार कर रहे हैं।

श्रीराम को मिला घर, अब बनाएंगे अपना आश्रमः
आजमगढ़ जिले के अतरौलिया क्षेत्र के रतुआपार गांव निवासी ओमप्रकाश पांडेय का नाम बाबरी मस्जिद विंध्वस मामले में प्रमुख 19 आरोपियों में से एक है। टेंट में विराजमान श्रीराम लला को घर दिलाने के लिए ही ओमप्रकाश ने जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही घरबार छोड़ दिए थे। अब जब 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा तो ओमप्रकाश पांडेय भी सुर्खियों में आ गए। ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि अब रामलला को घर मिल गया, तो वे अपना भी कहीं आश्रम बनाएंगे। ओमप्रकाश ने बताया कि मस्जिद विंध्वंस के मामले मे आरोपी बनाए जाने के बाद से ही वे घरबार और अन्न छोड़ दिए। अब उनका नया नाम जगत गुरु स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महराज है। अभी तक उनका कोई स्थाई ठिकाना नहीं है। राममंदिर उद्घाटन के बाद अब अपना कहीं स्थाई आश्रम बनाएंगे। एक सवाल के जवाब में ओमप्रकाश जी ने बताया कि उन्हे कोर्ट से नोटिस मिलने पर अदालत में पेश हुए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *