शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए छात्रों ने फूंका विगुल

महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के कार्यालय पर किए प्रदर्शन, सौंपे ज्ञापन

आजमगढ़।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद डी. ए.वी.पी.जी कॉलेज इकाई द्वारा महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के अस्थाई कार्यालय पर शुक्रवार को जमकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने कुलसचिव के नाम से ज्ञापन सौंपा। आरोप है की महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ में शैक्षिक अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का बोलबाला है। छात्र नेताओं ने इसकी जांच कर समाप्त करने की मांग किए।
अध्यक्षता पूर्व कालेज इकाई अध्यक्ष राज सिंह ने किया। जबकि संचालन रमन राय ने किया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री शिवम ने कहा कि छात्र कल का नहीं आज का नागरिक है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जब आजमगढ़ विश्वविद्यालय अलग हुआ तो लोगों में बहुत उम्मीद थी शिक्षक और विद्यार्थी दोनों बहुत उत्साह पूर्वक इस दृष्टि से इस विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षित देख रहे थे, लेकिन विश्वविद्यालय के अंदर इतनी खामी और उसके उदासीनता के कारण आज ये दिन देखना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को शासन द्वारा निर्धारित एक शुल्क रखने की व्यवस्था किया गया है। लेकिन यह विश्वविद्यालय हर विश्वविद्यालय से ज्यादा ₹1500 वसूल रहा है। बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों का परीक्षा शुल्क ₹800 रुपया हैं। छह सूत्रीय मांगों को सौंपते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई और एक सप्ताह के अंदर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्त्ता विश्वविद्यालय से जुड़े हुए सभी महाविद्यालयों की विद्यार्थी एक बड़े आंदोलन को बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होंगी।
कुल सचिव के नाम से ज्ञापन सौंपते हुए विद्यार्थियों ने बताया कि जिन महाविद्यालयों में एनसीटीई की मानता नहीं है। उन महाविद्यालय में सभी प्रवेशित छात्रों का स्थानांतरण उस महाविद्यालय में किया जाए जहां एनसीटीई की मान्यता है तथा अभी भी सीट रिक्त है ।

अंक पत्र जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की मांगः
छात्र नेताओं की मांग है की विश्वविद्यालय द्वारा जितनी भी कक्षाओं का परीक्षा फल घोषित किया गया है, वह एक सप्ताह के अंदर सभी छात्रों के अंक पत्र उपलब्ध कराया जाए।
NEP 2020 के अनुसार प्रायोगिक परीक्षा के परीक्षकों का निर्धारण का अधिकार महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य को तथा विश्वविद्यालय स्तर पर विभागध्यक्षों को दिया जाए।
सभी पाठ्यक्रमों में परीक्षा शुल्क का निर्धारण अन्य राज्य विश्वविद्यालयों के अनुरूप किया जाए। विश्वविद्यालय में लगातार छात्रों के प्रवेश में वर्षवार आ रही गिरावट के संबंध में एक समिति का गठन किया जाए तथा समिति की रिपोर्ट पर विश्वविद्यालय द्वारा अमल किया जाए।

इन छात्र नेताओं की रही मौजूदगीः
प्रदर्शन के दौरान आशुतोष, उत्कर्ष विक्रम सिंह, प्रियांशु, शिवांश शिवम, जितेंद्र कुमार प्रजापति, रामअवध यादव, कृपामणि, लक्ष्य, हर्षित, समेत सैकड़ों विद्यार्थी मौजूद रहे।

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