दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित निज़ामाबाद , ब्लैक पॉटरी के कलाकार शिवरतन प्रजापति को एसडीएम निजामाबाद द्वारा धमकाने-पिटवाने के आरोप के बाद सामाजिक न्याय मंच, सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित से मुलाक़ात की। राज्य पुरस्कार से सम्मानित शिवरतन प्रजापति से पुरानी तहसील निज़ामाबाद स्थित उनके आवास पर प्रतिनिधिमंडल ने मुलाक़ात की। प्रतिनिधिमंडल में सत्यम प्रजापति, यमुना प्रजापति, राजनाथ ‘राज’, अंकित प्रजापति, रामाश्रय निषाद, राजेन्द्र यादव शामिल थे। वक्ताओं ने कहा यह घटना कानून के राज और प्रशासनिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम निजामाबाद पर तानाशाही और गैरकानूनी कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कड़ी कर्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित शिवरतन प्रजापति ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि 21 जनवरी 2026 की शाम लगभग 4 बजे अचानक एसडीएम निजामाबाद की गाड़ी उनके घर पहुंची। गाड़ी के साथ दो गार्ड और साथ में सफीक नाई भी आए, जिन्होंने बिना कोई कारण बताए हस्तशिल्प कलाकार शिवरतन प्रजापति को जबरन अपने साथ ले गए। गाड़ी में बैठते ही उनका मोबाइल फोन छीन लिया। इसके बाद उन्हें तहसील ले जाकर एसडीएम के चैंबर में रखा गया। बिना कोई गलती बताए उन्हें एसडीएम द्वारा चैम्बर में ही पिटवाया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई।
शिवरतन प्रजापति ने अपनी गलती पूछी तो एसडीएम ने कहा-‘तुम नेता बनते हो, बहुत बड़ा सम्मान पा गये हो, कलाकारी में तो तुम्हारा मन बढ़ गया है। तुम्हारा यही इलाज है।’ इसके बाद उनसे जबरन माफीनामा लिखवाया गया और धमकाकर छोड़ दिया गया।
सामाजिक न्याय मंच के सत्यम प्रजापति ने कहा कि निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी ने आजमगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्रसिद्ध हस्तशिल्प कलाकार शिवरतन प्रजापति जिन्हें स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, के साथ एसडीएम द्वारा किया गया दुर्व्यवहार अत्यंत निन्दनीय है और यह क्षेत्र के सम्मान पर हमला है। यदि इस मामले में एसडीएम पर कार्रवाई नहीं हुई तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यमुना प्रजापति ने कहा कि बिना नोटिस के उठाना, माफीनामा लिखवाना और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी है। वहीं पूर्वांचल किसान यूनियन के राजनाथ ‘राज’ ने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि निजामाबाद की गरिमा और कारीगरों के आत्मसम्मान का प्रश्न है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
गौरतलब है कि प्रकरण निजामाबाद के फरहाबाद स्थित शिल्प कला उद्योग की सरकारी जमीन से जुड़ा है, जहां सरकार की ओर से सुन्दरीकरण के तहत साफ-सफाई का कार्य चल रहा था। उसी स्थल पर कुम्हारी कला के लिए उपयोग में लाई जाने वाली मिट्टी रखी हुई थी। पास में सफीक नाई की गुमटी स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरे मामले में किसी प्रकार का कोई विवाद या अवैध गतिविधि नहीं थी।

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