दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
चिपको आंदोलन के पुरोधा सुंदरलाल बहुगुणा के जन्मदिवस के अवसर पर तमसा नदी की वर्तमान स्थिति, स्वच्छता, संरक्षण और भविष्य की चुनौतियों पर केंद्रित एक राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में नदी के पारिस्थितिकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह आयोजन लोक दायित्व एवं HESCO के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पद्म विभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि ” नदियों की परिभाषा पुनः गढ़ी जानी चाहिए। नदिया गांव से होकर गुजरती हैं, गांव और नेतृत्व को जोड़कर नदी और प्रकृति को सही किया जा सकता है। नदी जलागमों से बनती है और जलागमों पर अतिक्रमण हो गया है।”
विशिष्ट वक्ता के तौर पर गया केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने कहा कि तमसा का सर्फेस वाटर बहुत प्रदूषित है। कोलीफॉर्म नालों के माध्यम से घरों से आ रहे हैं। प्रदूषण के अन्य कारणों में रासायनिक उर्वरक, अतिक्रमण आदि भी है। नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एकीकृत ढंग से कार्य करना होगा।”

वेबीनार का विषय प्रवर्तन डॉ. पवन कुमार द्वारा किया गया। डॉ. पवन ने तमसा के उद्गम से संगम तक विषय पर प्रकाश डाला। तथ्यों के माध्यम से उन्होंने बताया कि वस्तुत: तमसा मऊ जनपद में ही समाप्त हो जाती है, आगे मूल सरयू ही गंगा में मिलती हैं।
उत्तराखंड से भारत सरकार द्वारा जल प्रहरी सम्मान प्राप्त मोहन चंद्र कांडपाल और पटना से पानी रे पानी के सूत्रधार पंकज मालवीय, बस्ती से शहआलम राणा, सरयू पर शोधछात्र अनिल वर्मा आदि ने भी अलग अलग विषयों पर प्रश्न और वार्ता किया।
कार्यक्रम का संचालन जय सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया।
वेबीनार में तमसा नदी से जुड़ी समस्याओं की पहचान, स्वच्छता अभियान, जनसहभागिता और समाधान की दिशा पर विचार-विमर्श किया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरणविद्, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिकों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों अरविंद कुमार सिंह, घनश्याम दुबे, वसीम अकरम आदि का विशेष योगदान रहा।

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