दैनिक भारत न्यूज

आजमगढ़।
बिलरियागंज ब्लाक क्षेत्र के पटवध कौतुक गांव में स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा एवं मानस यज्ञ के सातवें दिन मुख्य वक्ता ललित नारायण गिरी जी महाराज ने शिव विवाह को विस्तार से बताया। शिव विवाह पर चर्चा सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गये।
उन्होंने बताया कि जब हिमांचल के घर बिटिया के रूप में पार्वती जी का जन्म हुआ तो हिमांचल ने नारद मुनि को बिटिया के नामकरण के लिए बुलाया। हिमांचल ने बिटिया को नारद की गोंद में डाल दिया। बेटी की कुंडली नारद जी ने बता डाली। उनका नामकरण पार्वती के रूप में किया। उन्होंने कहा कि आगे चलकर उनकी शादी शिवजी से होगी और काफी तपस्या करने के बाद शादी होगी। पार्वती की ऋषि मुनियों द्वारा बीच-बीच में परीक्षा ली गई और कहा गया इतनी कठोर तपस्या क्यों शिव जैसे अघोरी के लिए कर रही हैं। पार्वती जी ने किसी की नहीं सुनी। अपनी तपस्या में लीन रहीं। शिवजी प्रसन्न होते हैं और प्रकट हो जाते हैं। शिवजी पार्वती को अपना दर्शन देखकर कहते हैं, तुम्हारे सभी मनोकामना पूर्ण होगी। वक्ता ने कहा शिवाजी के लिंग की पूजा होती है। उनहोंने बताया कि आकाश के देवता ब्रह्मा जी, पाताल के देवता विष्णु भगवान और धरती के देवता शिव जी हैं। उन्होंने कहा कि शिव जी और पार्वती के विवाह की अगुवाई नारद जी करते हैं। भक्तों ने शिव और पार्वती जी के विवाह का वर्णन किया। शिवजी के सिंगार कैसे होता है, उसकी करूण झांकी सुनाई। उनके और बाराती कैसे सजधज कर बाराती तैयार होते हैं। उन्होंने बताया कि बारातियों ने पूछा शिवजी से बारात कैसे चलेगी, तब शिवजी ने कहा सभी लोग अपने-अपने वहान से चलेंगे। 33 करोड़ देवी देवता भूत, प्रेत, पशु, पक्षी, हाथी, घोड़ा, शेर, भालू, नरमुंड तरह-तरह के बाराती शिवजी के बारात में चल पड़े। ढोल ताशा डमरू सहित नाचते गाते हिमांचल के दरबार में चलने के लिए रवाना हो गए। वक्ता ने शिवरात्रि पर्व का महत्व बताया। शिवरात्रि व्रत रहने पर कौन-कौन सा फल मिलता है। हर हर महादेव, जय बजरंगबली, जय श्री राम का जमकर श्रोताओं ने जयकारा लगाया। शिवरात्रि पर्व पर शिव मंदिर पर काफी दूर के लोग आते हैं। काफी भीड़ लगती है।

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