
आशीष तिवारी
आजमगढ़।
लोकसभा चुनाव 2024 संपन्न हो गया। पार्टीयां अब हार जीत के प्रमुख कारण का पता लगाने में जुट गयीं हैं। इस दौरान पार्टी से जुड़े लोग भी हार की मजबूत कड़ी को तलाश रहे हैं।
अब तक की गयी चर्चाओं के मुताबिक भाजपा द्वारा टिकट बंटवारे में घोर लापरवाही की गयी है। आजमगढ़ के लालगंज लोकसभा सीट के लिए भाजपा ने नीलम सोनकर को मैदान में उतारा था। नीलम सोनकर साल 2014 में आई मोदी की सुनामी में महज 62 या 63 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीतीं थी। नीलम ने सपा के विधायक बेचई सरोज को हराया था। इसके बाद नीलम सोनकर कोई चुनाव नहीं जीत पाई। वह लालगंज विधान सभा चुनाव भी हार गयीं थीं। नीलम के रवैये से पार्टी कार्यकर्ताओं और आमजनता में भी कोई रुचि नहीं थी, इसके बाद भी भाजपा शीर्ष नेतृत्व की तरफ से नीलम सोनकर को थोप दिया गया। उधर बीते कयी चुनावों में हार का मजा चक चुके सपा के दरोगा प्रसाद सरोज अपने अनुभव का भरपूर लाभ उठाया। उनके लोगों ने भी जमकर मेहनत किया। सपाईयों की तुलना में भाजपा के लोग केवल सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने तक रह गये। पार्टी के लोग अपने पुराने मूल वोटरों को घास तक नहीं डाले। यह स्थिति पूर्व के चुनाव में भी था। ऐसे में पार्टी के मूल वोटर नाराज थे। इसके अलावा प्रशासनिक दुर्वव्यवहार और मनमानी से भी कुछ प्रतिशत जनता नाराज रही। पार्टी की तरफ से उनकी कोई खोज खबर नहीं ली गयी। पार्टी के नेता भी नीलम सोनकर को हराने में लगे हुए थे। इसी तरह से सदर में दिनेश लाल यादव निरहुआ ने काम तो किया, लेकिन मूल सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। जिसका ताजा उदारहण रोडवेज की दुर्व्यवस्था है। लेकिन इस समस्या की तरफ सांसद, अधिकारी या अन्य किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। इसी तरह से अन्य प्रमुख कारण शामिल हैं।
लोगों की चर्चाओं में वाराणसी में बहुत कम वोटों के अंतर से प्रधानमंत्री की जीत और अयोध्या की सीट हार जाने की भी जोरों पर चर्चा है। लोग अपने अपने माध्यम और नजरिए से यहां के वोटरों को देख और परख रहे हैं।
