

दैनिक भारत न्यूज
आजमगढ़।
भीषण गर्मी में न्यायालय और विद्यालय का मार्निंग होना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। प्रदेश में अधिकांशतः सिविल व राजस्व न्यायालय द्वारा मई व जून माह में न्यायालय के पूर्व निर्धारित कार्यअवधि को बदलकर मार्निंग कर दिया जाता है। कहीं साढ़े छह बजे तो कहीं सात बजे से काम शुरू कर दिया जाता है।
जनपद के दूर दराज के कोने से आने वाले लोगों को पांच बजे ही घर छोड़ देना पड़ता है। पांच बजे भोजन को कौन कहे ठीक से नाश्ता भी नहीं तैयार हो पात है। भीषण गर्मी में खाली पेट ही वादकारी घर से न्यायालय के लिए निकल जाता है। न्यायालय में भागदौड़ करने के बाद ठीक खड़ी दुपहरिया में न्यायालय बंद होने के बाद वादकारी कचहरी से बाहर निकल जाता है। उसे वापस घर जाने के लिए धूप में ही बस स्टेशन जाना पड़ता है। वहां पर छाया की पर्याप्त व्यवस्था न होने और साधन न मिलने के कारण धूप और गर्म हवा के बीच इधर उधर भटकना पड़ता है। शाम तक घर पहुंचते पहुंचते कयी वादकारी बीमार हो जाते हैं। वादकारियों की इस समस्या की तरफ न्यायालय और सरकार का कोई ध्यान नहीं है। जिसकों लेकर वादकारी लोगों को कोस रहे हैं। यही हाल स्कूलों का भी है।
मौजूदा समय के मौसम पर गौर करें तो गर्मी अपने सारे रिकार्ड तोड़ रही है। पारा 46 या 47 डिग्री तक पहुंच जा रहा है। ऐसे में आसमान से सीधे आग बरस रही है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में भले ही परिवर्तन हो गया है, लेकिन हमारी न्याय व्यवस्था उसी पुराने ढर्रे पर चल रही है। जिसका आमजन को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मार्निंग कोर्ट की व्यवस्था प्रदेश के सभी जनपदों में नहीं है, यह नियम कुछ गिनेचुने जिलों में ही लागू है।
इस संबंध में लालगंज तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेश पाठक ने कहा कि मार्निंग कचहरी की परंपरा बहुत पुराना है, मौजूदा समय के मौसम को ध्यान में रखते हुए नियम में बदलाव करना चाहिए। इसी तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र सिंह ने कहा कि इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रसिध्द नारायण सिंह, पूर्व अध्यक्ष इंद्रभानु चौबे ने भी मार्निंग कचहरी की व्यवस्था को समाप्त करने की बात कहीं। अधिवक्ताओं ने कहा कि कचहरी दोपहर एक बजे बंद हो जाती है। उस समय प्रचंड धूप और गर्मी रहती है। ऐसे में वादकारी के पास इधर उधर घूमकर समय काटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
