गुर्गों के आतंक से आम नागरिक और पुलिस के अधिकारियों की उड़ी थी नींद

आए दिन धमकी और रंगदारी भरा फोन आने से बहुत से लोग हो गये थे भूमिगत

आशीष तिवारी

आजमगढ़।
पूर्व विधायक माफिया मुख्तार अंसारी मौत के बाद भले ही कब्र में दफन हो गया, लेकिन उसके जीवन से जुड़े चर्चित मामलों की अभी भी जोरशोर से चर्चाएं हो रही हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच इस बात की भी चर्चा है कि आजमगढ़ जिले में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों का नेटवर्क साल 2014 में तात्कालीन पुलिस अधीक्षक अनंत देव तिवारी ने ध्वस्त किया।
बता दें कि एसटीएफ वाराणसी की टीम द्वारा साल 2013 के अंत में मुख्तार गिरोह के शार्पशूटर एवं 50 हजार के इनामी छोटा पंकज यादव गिरफ्तार कर लिया गया। मऊ, गाजीपुर और आजमगढ़ के बार्डर से एसटीएफ के हत्थे चढ़ा छोटा पंकज आजमगढ़ शहर कोतवाल कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया। तात्कालीन कोतवाल एमपी शुक्ला की निगरानी में उसे आजमगढ़ जेल में रखा गया। जहां पहले से मुख्तार अंसारी के खास मेंहनगर क्षेत्र का रहने वाला कुख्यात श्यामबाबू पासी और उसके साथी भी मौजूद थे। आजमगढ़ जेल की दीवारें काफी पुरानी और जर्जर थीं। उधर मुख्तार भी सलाखों के पीछे था। ऐसे में गिरोह का पूरा टारगेट अधिक से अधिक रुपये इकट्ठा करने का था। जेल में श्यामबाबू, छोटा पंकज आदि जेल की जर्जर दीवारों कि ईंट निकालकर उसमें मोबाइल छिपा देते और मौका मिलते ही बाहर के लोगों को फोन करके रंगदारी मांगना शुरू कर दिए। धमकी भरा फोन यह लोग भट्ठा मालिक, ब्यापारी, कालेज प्रबंधक आदि को करते थे। एक बार रुपये के लिए जिसको फोन जाता, वह भूमिगत हो जा रहा था। कयी लोगों ने पुलिस में शिकायत किए, लेकिन जेल प्रशासन इसे कत्तई मानने को तैयार था कि फोन जेल से किसी बंदी ने किया है। यहीं पर आकर मामला अटक जा रहा था। पुलिस और जेल प्रशासन के बीच इसे लेकर तनातनी चलने लगी। दोनों विभाग के अधिकारी एक दूसरे की पोल तक खोलने लगे थे। विभागों के आपसी लड़ाई का फायदा अपराधी उठाने लगे और इनकी वसूली तेज हो गयी। भय के चलते जहानागंज क्षेत्र के कयी बड़े कारोबारी रुपये भी पहुंचा दिए थे। इस गिरोह के आतंक को देखते हुए सरकार ने अनंत देव तिवारी को सिद्धार्थ नगर जिले से आजमगढ़ जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त कर दिया। उधर अनंतदेव के आने के बाद अफराधियों ने धमकी का तरीका बदलते हुए जिन्हें धमकी दिलवानी होती तो उन्हे दुबई में बैठे अपने साथियों की मदद से इंटरनेट कालिंग से फोन कर धमकी दिलवाने लगे। इंटरनेट फोन नंबर को ट्रैक नहीं किया जा सका था। ऐसे में एसपी अनंत देव तिवारी ने सर्विलांस विशेषज्ञों सहित अन्य माध्यमों के जरिए खुलासा किया कि यह रंगदारी मुख्तार अंसारी के इशारे पर उसके गुर्गे मांग रहे हैं। इसी के साथ पुलिस कार्रवाई करते हुए न केवल मुख्तार अंसारी और गुर्गों को बेनकाब किया।बल्कि रौगदारी के लिए फोन करने के मामलों पर भी विराम लग गया।

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