
दैनिक भारत न्यूज
जौनपुर।
बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को पूर्वांचल के ज्यादातर लड़के ब्रांड समझ रहे थे। उनके नाम पर लोगों में खौफ पैदा कर रहे थे। खासतौर से रंगबाजों की जुबान पर अक्सर धनंजय का ही जिक्र होता था। ठेकेदारी, रंगदारी तक ली जा रही थी। यह बात अलग है कि ज्यादातर लोगों को भले ही धनंजय नहीं जानते रहे हों। लेकिन बुधवार को जौनपुर की विशेष अदालत ने अपहरण और रंगदारी के मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को सात साल जेल की सजा सुनाई। धनंजय को सजा मिलने से ब्रांड समझने वालों को झटका सा लग गया है। लगना भी स्वाभाविक है। क्योंकि अपराध जगत का यह मास्टरमाइंड काफी मामलों में साफ साफ निकल गया था। पहली बार ऊंट पहाड़ के नीचे आ है।
धनंजय सिंह पिछले तीन दशक में दर्जनों आपराधिक मामलों में नाम आने, भगोड़ा घोषित होने, कई बार जेल जाने, हिस्ट्रीशीटर से गैंगस्टर तक में नामित होने वाले धनंजय सिंह को पहली बार किसी मामले में सजा सुनाई गई है।
एक बार तो भदोही पुलिस ने किसी और को मारकर धनंजय सिंह का एनकाउंटर करने का दावा कर दिया था। इस बीच धनंजय सिंह ने एक दो नहीं तीन शादियां कीं। अपने समर्थकों की फौज भी तैयार कर ली। बिना किसी दल के चुनावी मैदान में उतरे और विधायक भी बन गए। बसपा का साथ मिला तो संसद तक का सफर तय कर लिया। अगर कहें कि धनंजय सिंह का पूरा सफर ही बॉलीवुड की किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
जौनपुर के बनसफा में सामान्य परिवार में जन्मे धनंजय ने जौनपुर के टीडी कॉलेज से छात्र राजनीती की शुरुआत की। यहां से राजधानी लखनऊ पहुंचे। लखनऊ विश्वविद्यालय में मंडल कमीशन की रिपोर्ट का विरोध कर छात्र राजनीति को धार दी। लखन विश्वविद्यालय में ही एक नेता के संपर्क में धनंजय और फिर हत्या, सरकारी ठेकों से वसूली, रंगदारी मुकदमों में नाम आने से सुर्खियों में रहने लगे।
1998 तक धनंजय सिंह का नाम लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक अपराध की दुनिया में चमक चुका था। उन पर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका था। अक्तूबर 1998 में पुलिस ने बताया कि 50 हजार के इनामी धनंजय सिंह और तीन अन्य बदमाशों के साथ भदोही-मिर्जापुर रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने आए थे। इस दौरान धनंजय समेत चारों बदमाश मार गिराए गए।
इसके बाद काफी समय तक लोग मान चुके थे कि धनंजय सिंह मारे जा चुके हैं। फरवरी 1999 में धनंजय अचानक पेश हुए और सरेंडर कर दिया। मुठभेड़ में धनंजय को मार गिराने का दावा करने वाली पुलिस के होथ उड़ गए। इस मामले में दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी।
धनंजय सिंह ने तीन शादियां की हैं। पहली पत्नी का संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद दूसरी शादी की। दूसरी पत्नी से तलाक के बाद तीसरी शादी भी की। धनंजय ने अपनी दूसरी पत्नी को विधायक बनाने की कोशिश की। तीसरी पत्नी इस समय जौनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। धनंजय ने पहली शादी बैंक मैनेजर की बेटी मीनू से 2006 में की थी। शादी के नौ महीने बाद ही मीनू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
