
दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो
आजमगढ़।
तसबरपुर थाना क्षेत्र के तहबरपुर गांव में 13 फरवरी को गोली मारकर सरसो के खेत में की गयी अधेड़ की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा लिया। पुलिस इस मामले में हत्यारोपी को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त तमंचा आदि भी बरामद कर ली।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन के मुताबिक तहबरपुर गांव निवासी विवेक कुमार यादव ने 14 फरवरी को तहबरपुर थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। उसका आरोप है कि 13 फरवरी को मैं व मेरे पिता रामप्रकाश यादव घर से खेत की निगरानी करने चिरावल गये थे, मैं निगरानी कर 12.30 बजे घर वापस आ गया और मेरे पिता वहीं खेत पर रुक गये। कहे कि तुम चलो मैं कुछ देर बाद घर आ रहा हूं । काफी समय हो जाने के बाद जब वह वापस नहीं आये तो मैंने उनके नम्बर पर फोन किया। फोन नहीं उठा तब मुझे शंका हुई , मैं व मेरे चाचा विनोद अपने पिता की ढूंढने के लिये खेत पर गये। लगभग 5.00 बजे शाम राजेन्द्र यादव के सरसों के खेत में मेरे पिता का रक्त रंजीत शव पड़ा था।
मुकदमा लिखकर शुरू हुई जांचः
एसपी ग्रामीण ने बताया पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान तथ्य प्रकाश में आया कि मृतक रामप्रकाश यादव की महिलाओं के प्रति उसके गांव व आस पड़ोस में आम सोहरत ठीक नहीं थी। गांव का कोई भी व्यक्ति मृतक को अपने घर पर आना पसन्द नहीं करता था। मृतक का (आरोपी) राहुल कुमार के घर छिपेतौर पर आना जाना था। जब इसकी जानकारी राहुल कुमार को हुई तो उसने मृतक को अपने घर से आने से मना किया, किन्तु मृतक नहीं माना। उपरोक्त से क्षुब्ध होकर राहुल कुमार ने अपनी बहन (बाल अपचारी) के साथ मिलकर रामप्रकाश (मृतक) को रास्ते से हटाने की योजना बनायी और योजनानुसार 13 फरवरी को दोपहर में धोखे से उसे राजेन्द्र यादव के सरसों के खेत मे बुलाया और पीछे से जाकर रामप्रकाश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी।
हत्यारोपी हुआ गिरफ्तारः
एसपी ग्रामीण ने बताया कि एसओ तहबरपुर मधुपनिका शनिवार को अपनी टीम के साथ अभियुक्त राहुल कुमार पुत्र स्व. ओमकार भारती निवासी चिरावलपुर थाना तहबरपुर को किशुनदासपुर जाने वाली नहर पटरी के पास से गिरफ्तार कर ली। उसके पास से घटना में प्रयुक्त तमंचा बरामद हुआ।
पूछताछ का विवरण ः
एसपी ग्रामीण ने बताया कि
गिरफ्तार अभियुक्त ने बताया कि रामप्रकाश यादव (मृतक) मेरे घर आता जाता था। उसका मेरे घर आना जाना पसन्द नहीं था। मैने रामप्रकाश को अपने घर से आने से मना किया, किन्तु रामप्रकाश नहीं माना और उसका आना जाना लगा रहा। मैं इसी बात से बहुत गुस्से में रहता था और अपने को अपमानित महसूस करता था। उपरोक्त अपमान से झुब्ध होकर मैंने अपनी बहन के साथ मिलकर रामप्रकाश (मृतक) को रास्ते से हटाने की योजना बनायी और 13 फरवरी को उसे सरसो के खेत में बुलाकर उसकी हत्या कर दिया।
