
कालेज में नियुक्त किए गये तमाम पदों की भर्तीयों को बताया जा रहा अवैध
प्रेसवार्ता करके कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली ने आरोपों को किया खारिज
आशीष तिवारी
आजमगढ़।
जिले के प्रतिष्ठित शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज में विभिन्न विषयों के सहायक प्रोफेसर की 46 पदों की नियुक्तियों में कथित धांधली का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राजभवन ने कुलपति से रिपोर्ट तलब की थी तो वहीं जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने इस मामले में तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। यह टीम एडीएम वित्त एवं राजस्व के नेतृत्व में 15 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। उच्च शिक्षा विभाग भी इस संबंध में जांच का निर्देश दे चुका है।
शिब्ली कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की भर्ती में कथित धांधली के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम सवाल उठ रहे हैं। कुछ मीडिया संस्थान ने कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली पर भी उनकी डिग्री और प्राचार्य पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। साथ ही कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की भर्ती में भी सवाल उठे।
अपने ऊपर लगे आरोपों और कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की भर्ती को लेकर प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली शुक्रवार को सामने आए और प्रेस वार्ता करके सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया।
उन्होने कहा की विभिन्न माध्यमों से यह संज्ञान में आया है कि महाविद्यालय में की जा रही नियुक्तियों के विरुद्ध कुछ लोग लामबन्द होकर महाविद्यालय प्रशासन एवं प्राचार्य के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। शिब्ली नेशनल कॉलेज जनपद का एक प्राचीन एवं अत्यन्त प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है। कुछ असामाजिक तत्वों को इस महाविद्यालय से इसकी प्रतिष्ठा से सदैव चिंता होती रही है। इन्हीं असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों द्वारा भ्रामक ख़बरों एवं मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर नियुक्ति को गलत कहकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जो कि सरासर नैतिकता एवं न्याय के विरुद्ध है। ऐसी मनगढ़ंत ख़बरें समाज में व्यक्ति विशेष तथा प्रतिष्ठित संस्था की छवि धूमिल करने के प्रयास में प्रसारित की जा रही हैं। उन्होने कहा कि महाविद्यालय के विभिन्न विभागों में सहायक प्रवक्ता के कई पद रिक्त थे। जिसके कारण पठन-पाठन के कार्य में अत्यंत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अतः छात्रहित को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रबन्ध समिति ने उक्त रिक्त पदों पर नियुक्तियों हेतु क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, वाराणसी तथा शिक्षा निदेशक उत्तर प्रदेश प्रयागराज के साथ समन्वय स्थापित कर नियुक्ति की कार्यवाही आरम्भ की गई तथा नियुक्ति करने हेतु अनुज्ञा प्राप्त करने के पश्चात अग्रिम कार्यवाही करते हुए विज्ञापन के माध्यम से आवेदन मांगे गये। उक्त आवेदकों को साक्षात्कार हेतु आमन्त्रित किया गया। साक्षात्कार चयन समिति द्वारा किया जाता जो उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के प्राविधानों के अनुसार विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से अनुमोदित विषय विशेषज्ञों को मिलाकर गठित होती है। साक्षात्कार में अभ्यर्थी के अकादमिक रिकॉर्ड, सम्बन्धित विषय में ज्ञान व पाठन की कुशलता इत्यादि के परीक्षणोपरान्त इसी चयन समिति द्वारा चयन की संस्तुति की जाती है, जिसे प्रबन्ध समिति की बैठक में अनुशंसा के उपरान्त विश्वविद्यालय को अनुमोदनार्थ अग्रसारित किया जाता है। उन्होने कहा कि महाविद्यालय में जारी नियुक्ति प्रक्रिया में उक्त उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के प्राविधानों का अक्षरशः पालन किया गया है। जांच होने पर सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
