तरवा गांव में आयोजित श्रीमत् भागवत कथा में उमड़ा जनसैलाब

दैनिक भारत न्यूज ब्यूरो

तरवा (आजमगढ़)।
स्थानीय बाजार में स्थित आरपीएम वाटिका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को अंतिम दिन था। आज की कथा समाप्त होने के साथ ही यह धार्मिक कार्यक्रम भी संपन्न हो गया। यहां आरती में लगभग हजारों लोग उपस्थित रहे। कथावाचक श्री श्री 1008 आचार्य श्री राधेय जी महाराज वृंदावन ने कहा कि सत्संग से व्यवहार बदल जाते हैं। परंतु सत्संग सुनाने वाला यदि लायक है तब बिना सत्संग के मनुष्य का जीवन अधूरा होता है। उन्होंने कहाकि मनुष्य के जीवन में दुख सुख दोनों भाई हैं। दुख के बिना सुख नहीं मिलता। यदि सुख मिलता है तो दुख जरूर प्रभु देते हैं। यदि दुख ना दे तो जीवन में वह सुख का आभास ही नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छा कभी पूरी नहीं होती है। इच्छाएं अनंत प्रकार की होती हैं। उन्होंने महर्षि  दत्तात्रेय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 24 गुरु बनाया था। उन्होंने कहा कि 24 गुरुओं से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी। यह भी बताया कि अधिक लगाव मनुष्य को दुख देता है। उन्होंने कहा कि श्री  कृष्णा यदि गोकुल जाते थे तो वृंदावन के लोग परेशान रहते थे। वृंदावन में आते थे तो गोकुल के लोग परेशान रहते थे। उनकी माया अपरंपार थी। वृंदावन और गोकुल के लोग अपना जीवन  कृष्ण कृष्ण कह कर बिताया करते थे। उन्होंने एक भजन भी गाया (तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का) इस गाने पर श्रोता झूमते नजर आए। शनिवार आखिरी दिन उन्होंने देर शाम तक कथा वाचन किए। इस कार्यक्रम के आयोजक भाजपा के वरिष्ठ नेता अखिलेश मिश्र उर्फ गुड्डू ने कहा कि रविवार को पूर्णाहुति तथा प्रसाद का आयोजन किया गया है। जिसमें लगभग 10000 लोगों के प्रसाद के रुप में भोजन करने की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा कि इस भागवत कथा में जिले के कोने-कोने से लोग आए और आनंद लिए। इस अवसर पर बहादुर चौबे, रामबचन सिंह, अरविंद जायसवाल, नानू मिश्र, प्रभाकर सिंह, डीके सिंह, कन्हैया सिंह, सच्चीदा सिंह, उमाशंकर मिश्रा, राजेश्वर मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।

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